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काशी जैसे अतिपवित्र धाम से क्यों नहीं लाते हैं गंगाजल, जानिए इसकी साइंटिफिक वजह
Gangajal Facts: शिव की नगरी काशी वाराणसी में देश-दुनिया से लाखों लोग गंगा में स्नान कर भगवान विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं। इतनी पवित्र स्थान होने के चलते यहां के गंगाजल को घर ले जाने की मनाही है।
- Written By: सीमा कुमारी

आखिर बनारस से गंगाजल लाना क्यों अशुभ (सौ.सोशल मीडिया)
kashi se jal kyu nahi lana chahiye : सनातन धर्म में गंगा जल का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि कोई भी पूजा पाठ, यज्ञ हवन और मांगलिक कार्य बिना गंगा जल के पूरा नहीं होता है। यही कारण है कि हिंदू श्रद्धालु जब तीर्थ स्थलों पर जाते है तो वहां से गंगा जल घर लाना नहीं भूलते है।
लेकिन, आपको बता दें, एक ऐसी जगह है जहां से गंगा जल लाने से आप जाने अनजाने में पाप की भागीदार बन सकते है। वो जगह और कोई नहीं बल्कि काशी यानी बनारस है।
आपको बता दें, शिव की नगरी काशी (वाराणसी) में देश-दुनिया से लाखों लोग गंगा में स्नान कर भगवान विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं। इतनी पवित्र स्थान होने के चलते यहां के गंगाजल को घर ले जाने की मनाही है।
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जैसा कि आप जानते हैं कि, काशी का गंगाजल पवित्र होने के बावजूद मोक्ष, तर्पण और आत्मा की शांति से जुड़ा होता है, इसलिए इसे घर लाने की परंपरा नहीं है। यह केवल धार्मिक कार्यों में उपयोग किया जाता है, न कि रोजमर्रा की पूजा-पाठ में। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर बनारस से गंगाजल लाना क्यों अशुभ माना जाता है।
आखिर बनारस से गंगाजल लाना क्यों अशुभ माना जाता है:
जल में मृत आत्माओं के अवशेष
काशी में गंगा किनारे मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट हैं, जहां दिन-रात अंतिम संस्कार होते रहते हैं। मान्यता है कि काशी का गंगाजल इन घाटों से भी प्रवाहित होता है और इसमें उन आत्माओं की ऊर्जा होती है, जो मोक्ष प्राप्त करने की प्रक्रिया में होती हैं। इसे घर लाने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ सकता है और परिवार में अशांति आ सकती है।
काशी को ‘मोक्षभूमि’ कहा जाता है
प्राप्त जानकारी के अनुसार, काशी को ‘मोक्षभूमि’ कहा जाता है, यानी यहां पर गंगा स्नान और मृत्यु के बाद मुक्ति प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान का जल मुख्य रूप से अंतिम संस्कार और पितरों की शांति के लिए उपयुक्त है, न कि घर में रखने के लिए।
कई लोग इस जल का उपयोग श्राद्ध कर्म और तर्पण के लिए करते हैं, इसलिए इसे घर लाना शुभ नहीं माना जाता है।
जानिए क्या है वैज्ञानिक कारण
अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो शिव की नगरी काशी में हर दिन असंख्य लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसके बाद उनके अवशेष गंगा में विसर्जित कर दिए जाते हैं। यूं तो गंगाजल शुद्ध होता है लेकिन काशी के पानी में कई तरह के कीटाणु होते हैं जो हमारे हेल्थ के लिए अच्छे नहीं होते है। ऐसे में घर जाना खतरनाक हो सकता है। इस कारण भी काशी के जल को वहां से अपने घर नहीं लाना चाहिए।
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यह भी कहती हैं मन्यताएं
बनारस को लेकर यह कहा जाता है कि अगर वहां से गंगाजल या मिट्टी को अपने साथ लाया जाए, तो इससे आपको पाप लग सकता है। जिसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यहां की मिट्टी और जल लाने से आप इसमें मौजूद जीवों को आप मोक्ष से वंचित कर देते हैं, जिस कारण आपको पाप का सामना करना पड़ सकता है।
Why is it considered inauspicious to bring ganga water from banaras
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