
ऐसे करें ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा (सौ.सोशल मीडिया)
ज्येष्ठ अमावस्या सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस बार ज्येष्ठ अमावस्या 27 मई को मनाई जाएगी। कहते हैं इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य के कार्य करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन पितरों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और भोजन करवाना भी बेहद शुभ माना गया है। इस अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
ज्योतिषयों के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या का संबंध शनि देव से भी है, क्योंकि इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इसे शनि जयंती और शनि अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से शनि देव की पूजा और उनसे संबंधित उपाय करने के लिए शुभ माना जाता है। आइए, जानते हैं इस साल ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि और मुहूर्त के बारे में।
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ऐसे करें ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा
ज्येष्ठ अमावस्या का क्या है महत्व
धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है और पितृ दोष से भी छुटकारा मिलता है।
इस तिथि पर पितरों को तर्पण और पिंडदान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे न केवल पितरों की शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति को भी पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है।






