मराठी गौरव दिन पर सेवा का संकल्प, 10 हजार छात्रों को शैक्षणिक किट; नासिक से शुरुआत

Marathi Bhasha Gaurav Din: मराठी भाषा गौरव दिवस पर कुसुमाग्रज विचार मंच आदिवासी छात्रों को 10,000 किट व 100 स्कूलों को LED स्क्रीन देकर शिक्षा को नई दिशा देगा।
Pledge to serve on Marathi Pride Day, educational kits distributed to 10,000 students; starting in Nashik
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Tribal Students: नासिक कविवर्य कुसुमाग्रज (वि. वा. शिरवाडकर) की जयंती के अवसर पर 27 फरवरी को मनाए जाने वाले 'मराठी भाषा गौरव दिवस' को इस वर्ष एक विशेष सेवा कार्य के रूप में मनाया जाएगा।

नासिक से तात्यासाहेब (कुसुमाग्रज) के अटूट संबंधों को याद करते हुए, 'कुसुमाग्रज मराठी विचार मंच' ने आदिवासी क्षेत्र के छात्रों की शैक्षणिक उन्नति के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है।

इस विशेष अभियान का शुभारंभ पेठ तालुका के हरणगांव से होगा, जिसके तहत 10,000 छात्रों को शैक्षणिक सामग्री और 100 स्कूलों को 'एलईडी स्क्रीन' प्रदान करने का संकल्प लिया गया है।

कुसुमाग्रज की सामाजिक विचारधारा को आगे ले जाने के लिए विचार मंच ने इस वर्ष दुर्गम आदिवासी बस्तियों (पाड़ों) के छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पिछले 6 वर्षों से जारी इस प्रयास को अब व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है।

इस उपक्रम के अंतर्गत छात्रों को डिजिटल स्लेट, ड्राइंग बुक, पेंसिल, कलर बॉक्स और अन्य सामग्री का सेट दिया जाएगा। एक किट की लागत 400 रुपये है, और मंच ने दानदाताओं से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। विशेष रूप से, 100 सेट देने वाले दाताओं का नाम सामग्री पर अंकित किया जाएगा।

ऐसे बनें अभियान का हिस्सा

  • सहयोगः किट के लिए 400 रुपये और एलईडी स्क्रीन के लिए 31,000 रुपये ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं
  • संपर्कः इच्छुक नागरिक 9373900425 या kusumagrajmvm@gmail।com पर संपर्क कर सकते है।
  • कार्यक्रम के दिन आदिवासी जीवनशैली के अनुभव और वन-भोजन के लिए एक यात्रा का भी आयोजन किया गया है।
  • इच्छुक व्यक्ति 20 फरवरी तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

100 स्कूलों को बड़े एलईडी स्क्रीन

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 100 स्कूलों को बड़े एलईडी स्क्रीन और शैक्षणिक सामग्री से लैस पेनड्राइव भी दिए जाएंगे, कोई भी संस्था या व्यक्ति 31,000 रुपये का योगदान देकर एक स्क्रीन प्रायोजित कर सकता है।

इस अभियान की सफलता के लिए सतीश बोरा, दिलीप बारवकर, सुभाष सबनीस, जयप्रकाश मुथा, सुहासिनी वाधमारे और शिरिष देशपांडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति प्रयास कर रहे हैं।

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