नॉन वेज खाकर दर्शन का आरोप! मुस्लिम नेता के मंदिर पहुंचने पर बवाल, गोमूत्र से किया गया शुद्धिकरण

Abdul Sattar Nageshwar Temple: छत्रपति संभाजीनगर में पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के नागेश्वर मंदिर दर्शन के बाद युवकों ने गोमूत्र से शुद्धिकरण किया। मांसाहार के आरोप पर मचा बवाल।
Abdul Sattar Nageshwar Temple
Abdul Sattar Nageshwar Temple (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Abdul Sattar News: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के मंदिर दर्शन को लेकर स्थानीय युवकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। घटना रहीमाबाद स्थित ऐतिहासिक नागेश्वर मंदिर की है, जहाँ 15 फरवरी को सत्तार दर्शन के लिए पहुँचे थे। उनके जाने के बाद कुछ युवकों ने मंदिर परिसर को 'अशुद्ध' बताते हुए वहाँ गोमूत्र छिड़का और शुद्धिकरण की प्रक्रिया की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

अब्दुल सत्तार, जो वर्तमान में शिंदे गुट की शिवसेना के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में से एक हैं, हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं। वे महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का आशीर्वाद लेने मंदिर गए थे। हालांकि, उनके बाहर निकलते ही कुछ युवाओं ने मंदिर की मर्यादा भंग होने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। युवकों का दावा है कि एक मांसाहारी व्यक्ति का पवित्र दिन पर मंदिर में प्रवेश करना धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।

'नॉन-वेज' खाने के आरोप पर छिड़ा विवाद

विरोध करने वाले युवकों ने बेहद गंभीर और निजी आरोप लगाते हुए कहा कि अब्दुल सत्तार मांसाहारी भोजन के बिना घर से बाहर नहीं निकलते। उनके अनुसार, महाशिवरात्रि जैसे व्रत और पवित्रता के दिन एक ऐसे व्यक्ति का मंदिर आना, जिसने कथित तौर पर सुबह मांसाहार किया हो, स्वीकार्य नहीं है। इसी तर्क को आधार बनाकर युवकों ने पूरे मंदिर परिसर में गोमूत्र छिड़ककर उसे 'पवित्र' करने का दावा किया। हालांकि, सत्तार की टीम ने इन आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन खुद पूर्व मंत्री की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

साइकिल की दुकान से कैबिनेट मंत्री तक का सफर

अब्दुल सत्तार का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। 1 जनवरी 1965 को सिल्लोड में जन्मे सत्तार ने एक छोटी सी साइकिल की दुकान से अपना कामकाज शुरू किया था। 1984 में ग्राम पंचायत से राजनीति में कदम रखने वाले सत्तार 1994 में सिल्लोड के नगराध्यक्ष बने। लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद 2019 में वे शिवसेना में शामिल हुए और उद्धव सरकार में राज्यमंत्री बने। बाद में 2022 में वे एकनाथ शिंदे के साथ बगावत में शामिल हुए और शिंदे-फडणवीस सरकार में अल्पसंख्यक विकास, कृषि और मार्केटिंग जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे।

आस्था और राजनीति के बीच फंसा मामला

अब्दुल सत्तार को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो मुस्लिम होने के बावजूद अक्सर मंदिरों में जाते हैं और हिंदू त्योहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक कट्टरता और राजनीतिक पहचान के बीच की बहस को छेड़ दिया है। जहाँ एक पक्ष इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बता रहा है, वहीं सत्तार के समर्थक इसे एक निर्वाचित प्रतिनिधि के अपमान और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल, पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मंदिर प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

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