

Rudraksh Rules: रुद्राक्ष भगवान शिव को अति प्रिय है। हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को भोलेनाथ के प्रतीक के रूप में पूजा गया है। मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से बना है, इसलिए सृष्टि में इससे ज्यादा पवित्र और कुछ भी नहीं। धर्म शास्त्रों में रुद्राक्ष को चमत्कारी और अलौकिक माना गया है। कहते हैं कि रुद्राक्ष धारण करने से नकारात्मकता दूर होती है। लेकिन इसे पहनने के कुछ नियम होते हैं। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के नियम-
किन लोगों को नहीं धारण करना चाहिए रुद्राक्ष
सोते समय न पहनें रुद्राक्ष
शास्त्रों के अनुसार, जब भी सोने जाएं तो उस समय रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए। सोने से पहले रुद्राक्ष को गले से उतारकर अपने सिरहाने पर जरूर रखें। ऐसा करने से मन शांत रहता है और बुरे सपने नहीं आते। ऐसा माना जाता है कि सोने के दौरान और बाद में शरीर में कुछ अशुद्धि आ जाती है। जिसके कारण से रुद्राक्ष की पवित्रता पर इसका असर होता है।
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गर्भावस्था में नहीं धारण करना चाहिए रुद्राक्ष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। यदि किसी गर्भवती महिला ने रुद्राक्ष धारण किया हुआ है तो बच्चे के जन्म के बाद सूतक काल समाप्त होने तक उसे उतार देना चाहिए।
शव यात्रा में नहीं पहनना चाहिए रुद्राक्ष
अगर किसी की मृत्यु हो गई हो और उसकी शव यात्रा में जाएं तो रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए। कहते है श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के दौरान रुद्राक्ष पहनना वर्जित माना गया है। इससे रुद्राक्ष अपवित्र हो जाता है और जीवन में कष्ट आने शुरू हो जाते हैं।
मांस और मदिरा का सेवन करते समय न पहनें रुद्राक्ष
रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रसाद माना गया है। ऐसे में इसकी पवित्रता का ध्यान हमेशा रखना चाहिए। अगर आप मांसाहारी हैं तो मांस खाते समय और मदिरा का सेवन करते समय भूलकर भी रुद्राक्ष धारण न करें। इससे रुद्राक्ष की पवित्रता भंग होती है और व्यक्ति को विपरीत परिणाम प्राप्त होते हैं।
रुद्राक्ष पहनते समय इस बात का विशेष ध्यान
रुद्राक्ष पहनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि रुद्राक्ष गलती से भी काले धागे में नहीं होना चाहिए। रुद्राक्ष को हमेशा लाल या पीले धागे में ही धारण करना चाहिए। इसके अलावा रुद्राक्ष को कभी अशुद्ध हाथों से नहीं छूना चाहिए और अपना रुद्राक्ष किसी दूसरे को पहनने के लिए न दें।