(फोटो सोर्स सोशल मीडिया)
भगवान गणेश को समर्पित दस दिवसीय गणेशोत्सव देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह स्थापित भव्य पंडालों में गणपति बप्पा विराजमान हो चुके हैं। गणेशोत्सव को लेकर श्रद्धालु भी प्रसिद्ध गणपति मंदिरों के दर्शन करने जा रहे हैं। देशभर में ऐसे हजारों प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध गणेश मंदिर जयपुर में स्थित है। यहां नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में बिना सूंड वाले गणेश जी विराजमान हैं।
जी हां, बिना सूंड वाले गणेश जी की बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ये सच है। दरअसल, यहां स्थित मंदिर में गणेश जी के बाल रूप की प्रतिमा स्थापित है। गणेश जी के बाल स्वरूप को देखकर यहां आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है। बिना सूंड वाले गणेश जी को देखकर लोग चकित भी हो जाते हैं।
जानकारों के अनुसार, ये देश में संभवत एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां बिना सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा है। रियासतकालीन यह मंदिर गढ़ शैली में बना हुआ है। इसलिए इसका नाम गढ़ गणेश मंदिर पड़ा। बताया जाता है कि गणेश जी के आशीर्वाद से ही जयपुर की नींव रखी गई थी।
यह मंदिर रियासतकालीन है और करीब 290 साल पुराना बताया जाता है। यहां गणेशजी के दो विग्रह हैं। जिनमें पहला विग्रह आकड़े की जड़ का और दूसरा अश्वमेध यज्ञ की भस्म से बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, नाहरगढ़ की पहाड़ी पर महाराजा सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ करवा कर गणेश जी के बाल्य स्वरूप वाली इस प्रतिमा की विधिवत स्थापना करवाई थी।
इस पहाड़ी पर मंदिर में भगवान गणेश जी की प्रतिमा को इस प्रकार प्रतिष्ठापित किया गया है कि परकोटे में स्थित सिटी पैलेस के चन्द्र महल से दूरबीन द्वारा भगवान की प्रतिमा साफ दिखाई देती हैं। कहा जाता है कि रियासत काल में चंद्र महल से महाराजा दूरबीन से भगवान के दर्शन किया करते थे। मंदिर परिसर में पाषाण के बने दो मूषक भी स्थापित हैं जिनके कान में भक्त अपनी इच्छाएं बताते हैं और मूषक उनकी इच्छाओं को बाल गणेश तक पहुंचाते है।
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यहां ऐसी अनोखी गणेश प्रतिमा के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से भक्त आते हैं। भक्तों का विश्वास है कि गढ़ गणेश से मांगी जाने वाली हर मनोकामना पूरी होती है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचे के लिए कुल 365 सीढ़ियां है। जो साल के दिनों को आधार मानकर बनाई गई थी। मंदिर तक जाने के रास्ते में एक शिव मंदिर भी आता है जिसमें पूरा शिव परिवार विराजमान है।
लेखिका- सीमा कुमारी