शिवशक्ति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है एकम्बरेश्वर मंदिर, चमत्कार जानकर रह जाएंगे दंग

Ekambareswarar Temple in Tamilnadu: भगवान शिव के कई बड़े और प्राचीन मंदिर है लेकिन तमिलनाडु में स्थित एकम्बरेश्वर मंदिर इनमें से ही खास है। यह मंदिर तत्व पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करते है।
प्रेम और समर्पण का प्रतीक है एकम्बरेश्वर मंदिर
एकम्बरेश्वर मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Ekambareswarar Temple: भारत में कई प्राचीन मंदिर है जो किसी न किसी रूप में विशेष महत्व रखते है। हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। इसमें ही भगवान शिव की पूजा और महिमा का बखान हर कोई भक्त करता है। भगवान शिव का बखान किया जाए तो, जिनका न कोई आदि न अंत है। पंचभूत तत्व जिनके अधीन हैं, वे भगवान शिव हैं।

वैसे तो भगवान शिव के कई बड़े और प्राचीन मंदिर है लेकिन तमिलनाडु में स्थित एकम्बरेश्वर मंदिर इनमें से ही खास है। यह मंदिर पांच तत्वों में से एक तत्व पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करता है।

आस्था और चमत्कारों के लिए खास है मंदिर

बताते चलें, तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित एकम्बरेश्वर मंदिर आस्था और चमत्कारों के लिए खास मंदिर है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से पहुंचते है। मंदिर में भगवान शिव एकम्बरेश्वर शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और उनकी पत्नी यानी मां पार्वती एलावार्कुझाली के रूप में विराजमान हैं। एकम्बरेश्वर भारत के सात सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है और बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस कांचीपुरम में स्थित मंदिर की बात करें तो, मंदिर परिसर 40 एकड़ में फैला है। मंदिर में एक हजार स्तंभों वाला अयिरम काल मंडपम भी बना है, जिसकी दीवारों पर भगवान शिव की अलग-अलग प्रतिमाओं को उकेरा गया है। दीवारों पर 1008 शिवलिंगों की शृंखला बनी है, जो देखने में अद्भुत लगती है। इस मंडपम का निर्माण विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय ने कराया था।

जानिए कैसे बना मंदिर

आपको इस एकम्बरेश्वर मंदिर की बात करें तो, यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार बताया गया है कि, माना जाता है कि भगवान शिव को पाने के लिए उन्होंने आम के पेड़ के नीचे कड़ी तपस्या की थी। अब भगवान शिव ने मां पार्वती की परीक्षा लेने की सोची और आम के पेड़ को भस्म कर दिया, जिससे बचने के लिए मां पार्वती ने भगवान विष्णु से मदद मांगी।

भगवान विष्णु ने मां पार्वती की मदद की और पेड़ को भी सुरक्षित बचा लिया, जिसके बाद भगवान शिव ने मां गंगा को उन्हें डुबोने के लिए भेजा, लेकिन मां पार्वती और मां गंगा बहनें हैं। ऐसे में मां पार्वती ने उन्हें भी वापस भेज दिया। भगवान शिव मां पार्वती के इतने दृढ़ निश्चय को देखकर प्रसन्न हुए और मानव रूप में अवतरित होकर उनसे विवाह किया था।

निसंतान दंपति के लिए खास है मंदिर

यहां पर बात करें तो, यह मंदिर खास मंदिर में से एक तो कई मान्यताएं और चमत्कार भी यहां गिने जाते है। कहते है कि, पेड़ के नीचे मां पार्वती ने भगवान शिव के लिए तपस्या की थी, भक्त उसे चमत्कारी पेड़ मानते हैं। भक्तों का मानना है कि जो भी निसंतान दंपति इस आम के पेड़ की पूजा करते हैं। उन्हें गुणी संतान की प्राप्ति होती है। यहां पर आम के पेड़ की बात करें तो, यह 3500 साल से भी ज्यादा पुराना है और आज भी पेड़ पर चार प्रकार के आम लगते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह चारों वेदों का प्रतीक है।

आईएएनएस के अनुसार

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com