पितृपक्ष में बिल्कुल न करें ये 3 काम, वरना झेलना पड़ सकता है 'त्रिदोष' और संतान प्राप्ति में अड़चन

Pitru Paksha Rituals: पितृपक्ष में कुछ ऐसी गलतियां भी हैं जो त्रिदोष को जन्म देती हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, अगर इन नियमों की अनदेखी हो जाए तो संतान प्राप्ति में बाधा, वंशवृद्धि की रुकावट आती हैं।
पितृपक्ष में बिल्कुल न करें ये 3 काम, वरना झेलना पड़ सकता है 'त्रिदोष' और संतान प्राप्ति में अड़चन
पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये 3 काम (सौ.सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Pitru Paksha 2025 सनातन धर्म में पितृ पक्ष का समय सबसे पवित्र माना गया हैं। यह अवधि 15 से 16 दिनों की होती है, जब पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण आदि किया जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों को याद कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में पितृ धरती लोक पर आते हैं और सभी के कष्टों को दूर करते हैं।

इस दौरान हर व्यक्ति अपने पितरों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करता है ताकि पितृ आत्माएं प्रसन्न होकर आशीर्वाद दें। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि पितरों की तृप्ति के बिना कोई भी कर्म पूर्ण नहीं माना जाता हैं।

लेकिन इसी पितृपक्ष में कुछ ऐसी गलतियां भी हैं जो त्रिदोष (देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण) को जन्म देती हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, अगर इन नियमों की अनदेखी हो जाए तो संतान प्राप्ति में बाधा, वंशवृद्धि की रुकावट और घर-परिवार में अशांति बनी रह सकती हैं। ऐसे में आइए जान लेते है पितृपक्ष में किन 3 कामों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए?

पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये 3 काम

विवाह या मांगलिक कार्य न करें

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, सगाई या कोई भी मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ अप्रसन्न हो जाते हैं और वंशवृद्धि पर ग्रहण लग जाता है। क्योंकि पितृपक्ष को शोक और स्मरण का काल माना गया हैं। इसलिए इस दौरान इन कामों को करने से बचना चाहिए।

तामसिक भोजन का सेवन

कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान शुभ कार्यो को करने के अलावा, खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान सात्त्विक जीवनशैली का पालन करना जरूरी है। इस दौरान मांस, मदिरा या तामसिक भोजन करना पितरों के प्रति अपमान माना जाता है। इससे पितरों की आत्मा को कष्ट होता है और संतान सुख से संबंधित बाधाएं बढ़ जाती हैं।

नमक, तेल और झाड़ू खरीदने से बचें

बता दें, पितृपक्ष के दौरान तामसिक भोजन के अलावा, नमक, सरसों का तेल और झाड़ू खरीदना भी अशुभ माना जाता हैं। कहा जाता है कि, इन चीजों का लेन-देन करने से घर में दरिद्रता और रोग प्रवेश करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह सीधा-सीधा पितृ दोष को बढ़ाता है और संतान प्राप्ति में भी बाधा डालता है। इसलिए कोशिश करना चाहिए कि इन दिनों इन चीजों को खरीदने से बचना चाहिए।

क्यों जुड़ा है यह सब संतान प्राप्ति से? जानिए

धर्मग्रंथों में संतान को पितरों का वंश आगे बढ़ाने वाला कहा गया है। अगर पितृ नाराज हो जाएं तो वे आशीर्वाद की जगह अवरोध खड़ा कर देते हैं। इसीलिए पितृपक्ष में शुद्ध आचरण, श्राद्ध और दान का पालन करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और संतान प्राप्ति में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

इसलिए इस पितृपक्ष आप भी इन तीन कामों से दूर रहें। श्रद्धा से पितरों का स्मरण करें और दान-पुण्य करें, तभी घर में सुख, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होगा।