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एक-एक सेकंड का हिसाब होगा! श्री प्रेमानंद जी महाराज का कर्म, ऋण और मुक्ति पर गूढ़ संदेश

Shri Premanand Ji Maharaj: एक-एक सेकंड का हिसाब होगा! यह वाक्य सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, इंसान यह सोचकर गलतियों में डूबा रहता है।

  • By सिमरन सिंह
Updated On: Jan 09, 2026 | 06:46 PM

Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)

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Every Second Will Be Accounted: एक-एक सेकंड का हिसाब होगा! यह वाक्य सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, इंसान यह सोचकर गलतियों में डूबा रहता है कि कोई देख नहीं रहा, लेकिन ईश्वर की व्यवस्था में हर पल, हर कर्म और हर भावना का लेखा-जोखा होता है। कामना यानी इच्छा ही आध्यात्मिक मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है, जो मनुष्य को छल, कपट और भोग-विलास की ओर ले जाती है।

कर्म के तीन मार्ग: आप किस रास्ते पर हैं?

शास्त्रों के अनुसार, मानव जीवन में किए गए कर्म तीन प्रकार के होते हैं:

कर्म:

वे कार्य जो शास्त्रों के अनुसार किए जाते हैं, लेकिन फल की इच्छा से। यह पुण्य तो देते हैं, पर बंधन भी बनाते हैं।

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विकर्म:

सबसे खतरनाक मार्ग। लालच, हिंसा, बेईमानी और वासना से किए गए निषिद्ध कर्म विकर्म कहलाते हैं। इनका फल भयंकर होता है और इन्हें केवल ईश्वर की कृपा ही नष्ट कर सकती है।

अकर्म:

यह मुक्त आत्मा की अवस्था है। जब मनुष्य बिना अहंकार, बिना फल की इच्छा, सब कुछ भगवान को अर्पित करके कर्म करता है, तब कर्म बंधन नहीं बनते।

कर्म से देवता भी नहीं बचे

श्री प्रेमानंद जी महाराज कर्म की गति समझाने के लिए देवताओं का उदाहरण देते हैं। देवराज इंद्र, जो देवताओं के राजा थे, अहिल्या के साथ किए गए पाप के कारण भयानक श्राप के भागी बने। उनका शरीर दुर्गंधयुक्त चिह्नों से भर गया। यह स्थिति तब समाप्त हुई जब उन्होंने भगवान श्रीराम की शरण ली। इससे स्पष्ट है कि कर्म की गति अटल है।

ऋणानुबंध: रिश्ते संयोग नहीं, हिसाब हैं

हम किस परिवार में जन्म लेते हैं, कौन हमारा पुत्र, पिता या मित्र बनता है यह सब ऋणानुबंध है। हम या तो पुराने जन्मों का ऋण चुकाने आते हैं या वसूलने। सुख-दुख का यह व्यापार जन्मों-जन्मों से चलता आ रहा है।

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जन्म-मरण के व्यापार से कैसे बाहर निकलें?

  • नए ऋण मत लो ऐसा कोई उपकार न लें जो नया बंधन बनाए।
  • पुराने ऋण माफ करो जो आपका बकाया है, उसे क्षमा करें और अपने ऋण प्रभु से प्रार्थना कर चुकाएं।
  • “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का रहस्य नाम जप और प्रार्थना से अपने पुण्य पूरे संसार को अर्पित करें। इससे सभी जीवों के साथ ऋणानुबंध शांत होता है।

समर्पण ही सबसे सरल मार्ग

ज्ञान से जीवनमुक्त होना कठिन है, इसलिए श्री प्रेमानंद जी महाराज समर्पण का मार्ग बताते हैं। दिन के अंत में अपने कर्मों की जांच करें, गलत विचारों को नोट करें और प्रार्थना करें “श्री कृष्णार्पणमस्तु” दो बातें हमेशा स्मरण रखें भगवान का नाम (नारायण) और मृत्यु का सत्य। जब यह समझ आ जाती है कि यह शरीर अस्थायी है, तो गंदी कमाई छूट जाती है और नाम-स्मरण व सेवा का मार्ग खुल जाता है। जब सब कुछ श्री राधा वल्लभ लाल को सौंप दिया जाता है, तब कर्मों का हिसाब वही संभाल लेते हैं।

A profound message from shri premanand ji maharaj on karma debt and liberation

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Published On: Jan 09, 2026 | 06:46 PM

Topics:  

  • Premanand Maharaj
  • Religion
  • Sanatan Hindu religion
  • Spiritual

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