मकर संक्रांति पर यहां पहले मां का आशीर्वाद, फिर होती है सूर्य पूजा, बिहार का चमत्कारी उग्रतारा मंदिर

Mahishi Ugratara Temple: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार देश के हर कोने में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं इसे खिचड़ी कहा जाता है, तो कहीं गंगा स्नान।
On Makar Sankranti, blessings from the mother goddess are sought first, followed by the worship of the Sun God, at this miraculous Ugratara Temple in Bihar.
Mahishi Ugratara Temple (Source. X)
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Bihar Shaktipeeth: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार देश के हर कोने में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं इसे खिचड़ी कहा जाता है, तो कहीं गंगा स्नान और दान-पुण्य की परंपरा निभाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए सूर्य देव की उपासना का विशेष विधान होता है। लेकिन बिहार में एक ऐसा मंदिर है, जहां सूर्य पूजा से पहले देवी मां का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता है। यह मंदिर है श्री उग्रतारा मंदिर।

कहां स्थित है श्री उग्रतारा मंदिर?

श्री उग्रतारा मंदिर बिहार के सहरसा जिले में स्थित है। सहरसा रेलवे स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर दूर महिषी गांव में यह प्राचीन मंदिर मौजूद है। इसे महिषासुरमर्दिनी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवती तारा की दिव्य प्रतिमा विराजमान है। मां उग्रतारा की मान्यता इतनी प्रबल है कि सालभर श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है।

मकर संक्रांति पर पहले मां, फिर सूर्य देव

स्थानीय परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भक्त पहले मां उग्रतारा के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद ही भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। माना जाता है कि मां की कृपा के बिना सूर्य पूजा अधूरी रहती है। इसी कारण इस दिन मंदिर में तड़के सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग जाती है।

मां को चढ़ता है 56 भोग

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मां उग्रतारा को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। इन भोगों में सामिष और निरामिष, दोनों प्रकार के व्यंजन शामिल होते हैं, साथ ही खट्टे-मीठे पकवान भी चढ़ाए जाते हैं। भोग अर्पण के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और हर संकट से मुक्ति मिलती है।

51 शक्तिपीठों में शामिल है मां उग्रतारा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां उग्रतारा का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां माता सती की बाईं आंख गिरी थी, इसी कारण इस स्थान का नाम उग्रतारा पड़ा।

यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। कई अघोरी और साधु यहां विशेष अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि काले जादू या नकारात्मक प्रभाव से ग्रसित व्यक्ति को मां तारा के दर्शन से राहत मिलती है।

नवरात्रि और शनिवार को उमड़ती है भीड़

नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेला लगता है और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। इसके अलावा हर शनिवार को भी मंदिर में दर्शन करने वालों का तांता लगा रहता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह मंदिर इच्छापूर्ति और मुक्ति का मार्ग खोलता है।

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