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बलराम जी का जन्म कैसे हुआ? जानिए चमत्कारी कथा जिसने बदल दिया इतिहास

Balarama Birth Story: द्वापर युग में अत्याचारी कंस का भय पूरे मथुरा में फैला हुआ था। वह अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव के एक-एक कर छह पुत्रों की निर्मम हत्या कर चुका था।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Feb 26, 2026 | 06:01 PM

Balarama birth story (Source. Pinterest)

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Balarama With Krishna: द्वापर युग में अत्याचारी कंस का भय पूरे मथुरा में फैला हुआ था। वह अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव के एक-एक कर छह पुत्रों की निर्मम हत्या कर चुका था। भविष्यवाणी थी कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का अंत करेगा, इसी डर से वह निर्दोष बच्चों का वध कर रहा था। उस कठिन समय में सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु ने एक दिव्य योजना बनाई।

सातवें पुत्र के रूप में शेषनाग का अवतार

भगवान विष्णु ने अपने अंश शेषनाग को देवकी के गर्भ में सातवें पुत्र के रूप में स्थापित किया। इसके साथ ही उन्होंने मां योगमाया को आदेश दिया “मेरा अंश देवकी के गर्भ में स्थित है उसे वहां से निकाल कर, गोकुल में नन्द बाबा के घर में निवास कर रहीं वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में प्रतिस्थापित करो। मैं स्वयं आठवें पुत्र के रूप में देवकी के गर्भ से जन्म लूंगा और तुम यशोदा के गर्भ से पुत्री रुप में जन्म लेना। ” यह आदेश केवल एक दिव्य लीला नहीं था, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना की शुरुआत थी।

योगमाया का चमत्कार

भगवान के आदेशानुसार योगमाया ने देवकी के गर्भ से सातवें शिशु को अदृश्य रूप से निकालकर गोकुल में रह रही रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया। बाहर से ऐसा प्रतीत हुआ मानो देवकी का गर्भपात हो गया हो। कंस, वासुदेव और देवकी सभी को यही लगा कि सातवां गर्भ नष्ट हो गया है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। दरअसल, यह सब भगवान की माया थी। वही सातवां पुत्र बाद में रोहिणी के घर जन्म लेकर बलराम के रूप में प्रकट हुए।

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रोहिणी के पुत्र के रूप में जन्म

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यदुवंश में बलराम जी का जन्म हुआ। वे चंद्रवंश के गौरव बने और आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के रूप में धर्म की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बलराम जी की जन्म तिथि को “हलषष्ठी” और “हरछट” के नाम से जाना जाता है, जिसे विशेष रूप से ग्रामीण और किसान परिवारों में श्रद्धा से मनाया जाता है।

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क्यों खास है यह कथा?

बलराम जी का जन्म केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि यह संदेश देता है कि अन्याय कितना भी प्रबल क्यों न हो, ईश्वर की लीला से धर्म की जीत निश्चित होती है। यह कथा साधारण परिवारों के लिए आशा, आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

Balarama born miraculous story that changed history

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Published On: Feb 26, 2026 | 05:44 PM

Topics:  

  • Lord Krishna
  • Lord Vishnu
  • Mahabharat
  • Religion
  • Sanatana Dharma
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