एग्जाम में मिला जीरो...सरकारी नौकरी में बने हीरो, राजस्थान सरकार की अजीबो-गरीब भर्ती

Rajasthan Government Job: राजस्थान में क्लास IV सरकारी कर्मचारी भर्ती के मानदंड को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कट-ऑफ मार्क्स जीरो तय किए गए जिसके चलते हाईकोर्ट ने इस अजीबो-गरीब भर्ती पर सख्त रुख अपनाया है।
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जीरो लाओ, नौकरी पाओ (Image Source: AI GENERATED)
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Zero Marks Government Job: राजस्थान में क्लास IV सरकारी कर्मचारियों की भर्ती उस समय सवालों के घेरे में आ गई जब इस भर्ती के एग्जाम को पास करने के लिए 'जीरो' मार्क्स की कट ऑफ तय की गई। इस मामले पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल पूछा कि उसने रिज़र्व कैटेगरी के तहत क्लास IV सरकारी कर्मचारियों की भर्ती के लिए कट-ऑफ मार्क्स ज़ीरो क्यों तय किए?

विनोद कुमार पुत्र प्यारेलाल बनाम राजस्थान राज्य मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस स्थिति पर सवाल उठाया। जस्टिस आनंद शर्मा ने इसे चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि मामला गंभीर है और सरकारी नौकरियों में बेसिक स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए इस पर गहराई से विचार करना जरूरी है।

हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछने के अलावा सही मानदंड तय करने को भी कहा। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्राधिकरण के रूप में राज्य की जिम्मेदारी है कि आरक्षित वर्ग की भर्ती में भी न्यूनतम मानक सुनिश्चित करे, जिससे चयनित उम्मीदवार अपना बुनियादी काम ठीक से कर सकें। अदालत ने कहा कि लगभग शून्य या नकारात्मक अंक लाने वाले को योग्य नहीं माना जा सकता।

नेगेटिव मार्क्स पर कैंडिडेचर रद्द

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि उसका कैंडिडेचर इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि उसे नेगेटिव मार्क्स (शून्य से नीचे) मिले थे, जबकि भर्ती प्रक्रिया में कोई न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तय नहीं किए गए थे। इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि या तो एंट्री-लेवल पदों के लिए परीक्षा अनावश्यक रूप से कठिन बनाई गई थी या फिर भर्ती में उचित मानक बनाए नहीं रखे गए। अदालत ने यह भी कहा कि न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तय न करने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है और लगभग शून्य या नेगेटिव अंक पाने वाले को योग्य नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने राजस्थान राज्य के वकील को निर्देश दिया कि संबंधित विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की ओर से हलफनामा दाखिल किया जाए, जिसमें इस गंभीर चूक, बेहद कम कट-ऑफ तय करने के कारणों और ऐसी स्थिति को सुधारने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जाए। बेंच ने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो अदालत इसे गंभीरता से लेते हुए कड़े आदेश दे सकती है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है। राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल कपिल प्रकाश माथुर और एडवोकेट संदीप माहेश्वरी पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट हरेंद्र नील, अमोघ गुप्ता और रोहन गुप्ता ने पक्ष रखा।

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