
जयपुर-दिल्ली हाईवे पर हादसा, फोटो- सोशल मीडिया
Kotputli-Behror Accident: राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा में रविवार की रात एक खौफनाक मंजर देखने को मिला। जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-48) पर एक अनियंत्रित केमिकल टैंकर और ट्रेलर के बीच हुई जोरदार टक्कर ने तबाही मचा दी। इस हादसे के बाद टैंकर से हुए केमिकल रिसाव ने देखते ही देखते हाईवे के एक किलोमीटर हिस्से को आग के दरिया में तब्दील कर दिया।
यह दर्दनाक हादसा रविवार रात को कोटपूतली के पावटा स्थित बस स्टैंड के पास घटित हुआ। प्रागपुरा थानाधिकारी भजनाराम चौधरी के अनुसार, केमिकल से भरा एक टैंकर जयपुर से दिल्ली की ओर जा रहा था। यात्रा के दौरान अचानक टैंकर बेकाबू हो गया और विपरीत दिशा से आ रहे एक ट्रेलर से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि टैंकर हाईवे पर ही पलट गया और उसमें भरा ज्वलनशील केमिकल पूरी सड़क पर बहने लगा। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग दहल गए और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
टैंकर से केमिकल रिसाव होने के कारण आग ने तुरंत विकराल रूप धारण कर लिया। चूँकि केमिकल अत्यधिक ज्वलनशील था, इसलिए आग केवल वाहनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क पर जहां-जहां केमिकल फैला, वहां तक आग की लपटें पहुंच गईं। देखते ही देखते करीब एक किलोमीटर का इलाका आग की चपेट में आ गया। स्थानीय चश्मदीदों ने बताया कि मंजर किसी भयावह फिल्म जैसा था, जहां पूरी सड़क आग के गोले में तब्दील हो चुकी थी। राहत की बात यह रही कि टक्कर होते ही दोनों वाहनों के ड्राइवर तुरंत बाहर निकलने में सफल रहे, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही प्रागपुरा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। आग की गंभीरता को देखते हुए न केवल कोटपूतली, बल्कि बहरोड़, नीमराणा और शाहजहांपुर से भी करीब आधा दर्जन दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं। दमकलकर्मियों को इस भीषण आग पर काबू पाने के लिए लगभग 2 घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। केमिकल की आग होने के कारण इसे बुझाना सामान्य आग की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण था।
इस हादसे के चलते जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-48) पर यातायात पूरी तरह से रुक गया। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने दोनों तरफ के ट्रैफिक को रोक दिया, जिसके कारण हाईवे पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। भीषण आग और धुएं के गुबार के कारण वाहन चालकों में डर का माहौल था। आग पर पूरी तरह काबू पाने और सड़क से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के बाद ही यातायात को धीरे-धीरे बहाल किया जा सका।
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गौरतलब है कि जयपुर-दिल्ली हाईवे पर यह कोई पहली बड़ी दुर्घटना नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हाईवे पर पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वाहन चालक सुरक्षा नियमों और गति सीमा का पालन नहीं करते हैं। भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और लापरवाही अक्सर ऐसे बड़े हादसों का कारण बनती है, जिससे न केवल जान-माल का नुकसान होता है बल्कि आम जनता को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।






