'वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें'... पाक नेता की सेना को खुली चुनौती, 8 तस्वीरों में जानें पूरे विवाद की कहानी

Pakistan Army Politics: पाकिस्तान के एक नेता ने सेना पर तीखा हमला बोलते हुए सैन्य नेतृत्व को वर्दी उतारकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी। तस्वीरों में जानें पूरे विवाद की कहानी।
'Take off the uniform and contest elections' — Pakistani leader's open challenge to the army; understand the full story of the controversy in 8 photos.
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पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक प्रमुख राजनीतिक नेता ने सेना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सैन्य नेतृत्व को सीधी चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि अगर सेना के शीर्ष अधिकारी राजनीति में दखल देना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपनी वर्दी उतारकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए। इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक प्रमुख राजनीतिक नेता ने सेना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सैन्य नेतृत्व को सीधी चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि अगर सेना के शीर्ष अधिकारी राजनीति में दखल देना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपनी वर्दी उतारकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए। इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
Asim Munir
नेता ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। अगर किसी को राजनीतिक फैसले लेने हैं या सरकार चलाने की इच्छा है, तो उसे चुनावी मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पर प्रभाव बनाए रखने के बजाय जनता के सामने जाकर वोट मांगना ही असली लोकतांत्रिक रास्ता है।
Pakistan flag
पाकिस्तान के इतिहास में सेना की भूमिका हमेशा चर्चा का विषय रही है। कई बार राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि सैन्य प्रतिष्ठान का देश की राजनीति और सरकारों पर प्रभाव रहता है। अलग-अलग दौर में इन आरोपों को लेकर देश में तीखी बहस होती रही है। हालांकि सेना हमेशा इन आरोपों से इनकार करती रही है और खुद को संविधान के दायरे में काम करने वाला संस्थान बताती है।
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इसे लोकतंत्र के पक्ष में उठाई गई आवाज बताया, जबकि अन्य नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान करार दिया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा और लोगों ने अलग-अलग राय रखी।
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इसे लोकतंत्र के पक्ष में उठाई गई आवाज बताया, जबकि अन्य नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान करार दिया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा और लोगों ने अलग-अलग राय रखी।
PAKISTAN
पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास कई बार सेना और निर्वाचित सरकारों के बीच तनाव का गवाह रहा है। देश में कई बार सैन्य शासन लागू हुआ और कई प्रधानमंत्रियों की सरकारें समय से पहले समाप्त हुईं। यही वजह है कि जब भी सेना की भूमिका पर कोई बड़ा बयान आता है, वह राष्ट्रीय बहस का विषय बन जाता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल किसी व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका को लेकर चल रही बहस का हिस्सा है। समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में सभी संस्थाओं को अपने संवैधानिक दायरे में रहकर काम करना चाहिए, जबकि आलोचकों का मानना है कि ऐसे बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं।
PAKISTAN HISTORY
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। यदि यह मुद्दा लगातार चर्चा में रहता है, तो राजनीतिक दल इसे चुनावी अभियान का हिस्सा बना सकते हैं। वहीं, सेना की ओर से आने वाली किसी भी प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में होने वाले ऐसे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर रखता है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, राजनीतिक स्थिरता और नागरिक-सैन्य संबंधों को लेकर समय-समय पर वैश्विक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराता है।

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