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भारत के 8 सबसे अमीर साधु-संत कौन हैं? आश्रम, ट्रस्ट, सामाजिक कार्य और प्रभाव की पूरी कहानी
India 8 Richest Spiritual Gurus: भारत के सबसे चर्चित और समृद्ध आध्यात्मिक गुरुओं के बारे में जानिए। उनके आश्रम, ट्रस्ट, सामाजिक कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और करोड़ों रुपये के संस्थागत नेटवर्क की पूरी जानकारी इस फोटो गैलरी में पढ़ें।
- Written By: वंदना शर्मा

जब भी देश के सबसे अमीर साधु-संतों की चर्चा होती है, तो लोगों के मन में पहला सवाल यही आता है कि आखिर एक संत के पास इतनी संपत्ति कैसे हो सकती है? वास्तव में अधिकांश बड़े आध्यात्मिक गुरु अपनी निजी संपत्ति के कारण नहीं, बल्कि उनके नाम से चलने वाले धार्मिक ट्रस्ट, आश्रम, विश्वविद्यालय, अस्पताल, गौशालाएं, योग केंद्र और सामाजिक संस्थाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। इन संस्थाओं का संचालन श्रद्धालुओं के दान, सामाजिक सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य वैध गतिविधियों के माध्यम से होता है। इसलिए किसी भी आध्यात्मिक गुरु की व्यक्तिगत संपत्ति और उनकी संस्था की संपत्ति को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।

श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की स्थापना की थी। आज यह संस्था दुनिया के 180 से अधिक देशों में सक्रिय है और करोड़ों लोग इससे जुड़े हुए हैं। संस्था योग, ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करती है। बेंगलुरु स्थित उनका अंतरराष्ट्रीय आश्रम हजारों एकड़ में फैला हुआ है, जहां हर साल लाखों लोग ध्यान और योग सीखने पहुंचते हैं। संस्था कई स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और सामाजिक परियोजनाएं भी संचालित करती है। इसी व्यापक नेटवर्क के कारण श्री श्री रविशंकर का नाम देश के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं में लिया जाता है।
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प्रसिद्ध भागवत कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर देशभर में अपने धार्मिक प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। उनके कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। धार्मिक आयोजनों के अलावा वे गौ सेवा, शिक्षा, धार्मिक जागरूकता और समाज सेवा से जुड़े कई अभियानों में भी सक्रिय रहते हैं। उनके ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिलता है।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन आज भारत की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्थाओं में से एक मानी जाती है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित ईशा योग केंद्र हर साल लाखों लोगों को आकर्षित करता है। सद्गुरु ने मिट्टी बचाओ और रैली फ़ॉर रिवर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनाया। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कई प्रोजेक्ट चलाती है। उनके कार्यक्रमों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि भारत के सबसे सम्मानित संतों में गिने जाते हैं। कुंभ मेले सहित कई बड़े धार्मिक आयोजनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वे आध्यात्मिक शिक्षा, वेदांत, भारतीय संस्कृति और युवाओं को नैतिक शिक्षा देने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। देशभर में उनके कई आश्रम और सेवा संस्थान संचालित होते हैं। लाखों श्रद्धालु उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं।

मोरारी बापू पिछले कई दशकों से रामचरितमानस की कथा सुनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों में भी उनकी कथाएं आयोजित होती रही हैं। उनकी कथाओं से प्राप्त सहयोग राशि का उपयोग विभिन्न सामाजिक और मानवीय कार्यों में भी किया जाता है। वे शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए समय-समय पर योगदान देते रहे हैं। उनकी सादगी और शांत व्यक्तित्व उन्हें अन्य कथावाचकों से अलग पहचान दिलाता है।

माता अमृतानंदमयी, जिन्हें दुनिया 'हगिंग सेंट' के नाम से जानती है, करोड़ों लोगों के बीच अपनी सेवा भावना और आध्यात्मिक जीवन के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी संस्था शिक्षा, अस्पताल, गरीबों के लिए आवास, आपदा राहत, छात्रवृत्ति, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम करती है। भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में उनकी संस्थाओं के केंद्र मौजूद हैं। उनके ट्रस्ट द्वारा संचालित विश्वविद्यालय और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी काफी चर्चित हैं।

बाबा रामदेव ने योग को टीवी और बड़े सार्वजनिक शिविरों के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंचाया। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ दुनिया के सबसे बड़े योग और आयुर्वेद संस्थानों में गिना जाता है। पतंजलि आयुर्वेद के जरिए आयुर्वेदिक दवाइयों, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग के उत्पादों का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ। हालांकि पतंजलि समूह एक कॉर्पोरेट और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित होता है, इसलिए इसे बाबा रामदेव की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं माना जाता। फिर भी उनके नेतृत्व में बने इस विशाल नेटवर्क ने उन्हें भारत के सबसे चर्चित संतों में शामिल कर दिया।

देश के अधिकांश बड़े आध्यात्मिक संगठनों ने कई दशकों में अपनी पहचान बनाई है। करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास, दान, स्वयंसेवकों की भागीदारी और समाज सेवा के कार्यों ने इन संस्थाओं को लगातार विस्तार दिया। आज इन संस्थाओं के पास स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, गौशालाएं, योग केंद्र, ध्यान केंद्र, पुस्तकालय, शोध संस्थान और सामाजिक सेवा परियोजनाएं संचालित होती हैं। यही कारण है कि इनका संस्थागत ढांचा काफी बड़ा दिखाई देता है। हालांकि इन सभी संस्थाओं का संचालन अलग-अलग ट्रस्ट या पंजीकृत संगठनों के माध्यम से किया जाता है

इन आध्यात्मिक गुरुओं की लोकप्रियता केवल धार्मिक प्रवचनों तक सीमित नहीं है। योग, ध्यान, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, प्राकृतिक जीवनशैली, सामाजिक सेवा और मानव कल्याण के क्षेत्र में इनके संगठनों ने व्यापक काम किया है। इसी वजह से इनके आश्रमों में हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं और देश-विदेश से श्रद्धालु इनकी संस्थाओं से जुड़ते हैं। हालांकि किसी भी आध्यात्मिक गुरु की व्यक्तिगत संपत्ति के बारे में बिना आधिकारिक प्रमाण के दावा करना उचित नहीं है। इसलिए उन्हें समझने का बेहतर तरीका उनके सामाजिक योगदान, संस्थागत कार्यों और समाज पर पड़े प्रभाव के आधार पर देखना है।
India 8 richest spiritual gurus photo gallery hindi
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