जब भी देश के सबसे अमीर साधु-संतों की चर्चा होती है, तो लोगों के मन में पहला सवाल यही आता है कि आखिर एक संत के पास इतनी संपत्ति कैसे हो सकती है? वास्तव में अधिकांश बड़े आध्यात्मिक गुरु अपनी निजी संपत्ति के कारण नहीं, बल्कि उनके नाम से चलने वाले धार्मिक ट्रस्ट, आश्रम, विश्वविद्यालय, अस्पताल, गौशालाएं, योग केंद्र और सामाजिक संस्थाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। इन संस्थाओं का संचालन श्रद्धालुओं के दान, सामाजिक सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य वैध गतिविधियों के माध्यम से होता है। इसलिए किसी भी आध्यात्मिक गुरु की व्यक्तिगत संपत्ति और उनकी संस्था की संपत्ति को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।