शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में, क्या ठंडे बस्ते में जाएगा केस?

Dombivli Doctors Assault Case: डॉक्टरों से मारपीट मामले में शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत। बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद केस में नया मोड़ आया है।
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शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Ramesh Mhatre Judicial Custody: कल्याण-डोंबिवली के राजनीतिक गलियारों में दबंग छवि रखने वाले शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं। डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने म्हात्रे को कल्याण कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस मामले में म्हात्रे की मुश्किलें तब बढ़ीं जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने निचली अदालत द्वारा म्हात्रे को आसानी से जमानत दिए जाने पर कड़ी हैरानी जताई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा अस्पताल में घुसकर तीन डॉक्टरों को बेरहमी से पीटना कोई साधारण बात नहीं है, यह डॉक्टरों के प्रति उसके हिंसक रवैये को दर्शाता है।

हाईकोर्ट का अल्टीमेंटम

कोर्ट ने म्हात्रे को 19 जुलाई 2026 की शाम 5 बजे तक डोंबिवली पुलिस स्टेशन में सरेंडर करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यहां तक चेतावनी दी थी कि अगर वे समय पर पेश नहीं होते, तो उनकी संपत्ति कुर्क की जा सकती है। इसी दबाव और कानूनी शिकंजे के बाद म्हात्रे को कोर्ट के सामने पेश होना पड़ा।

क्या अब ठंडे बस्ते में चला जाएगा मामला?

अक्सर देखा जाता है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में गिरफ्तारी के बाद जांच की गति धीमी पड़ जाती है, जिसे जनता मामला ठंडे बस्ते में जाना कहती है। लेकिन रमेश म्हात्रे के मामले में स्थितियां थोड़ी अलग नजर आ रही हैं।

  • हाईकोर्ट की निगरानी: चूंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया है और मजिस्ट्रेट के पुराने फैसलों पर सवाल उठाए हैं, इसलिए पुलिस प्रशासन पर इस केस को तार्किक अंत तक ले जाने का भारी दबाव है।
  • डॉक्टरों का आक्रोश: इस घटना के विरोध में डॉक्टरों की एसोसिएशन ने राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी। मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा और उनके सम्मान का मुद्दा अब एक बड़ा सामाजिक मुद्दा बन चुका है।
  • पुराना रिकॉर्ड: कोर्ट ने सुनवाई के दौरान म्हात्रे के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी संज्ञान में लिया है, जिसे पिछली बार नजरअंदाज कर दिया गया था।

न्याय की उम्मीद

शास्त्री नगर अस्पताल में हुई इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर डॉक्टरों के मनोबल पर गहरा असर डाला था। म्हात्रे को मिली 14 दिनों की जेल इस बात का संकेत है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और सत्ता की हनक डॉक्टरों की सुरक्षा से बड़ी नहीं हो सकती। फिलहाल, रमेश म्हात्रे सलाखों के पीछे हैं और जांच जारी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी मजबूती से चार्जशीट पेश करती है, ताकि भविष्य में सफेदपोश लोग 'धरती के भगवान' कहे जाने वाले डॉक्टरों पर हाथ उठाने से पहले सौ बार सोचें।

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