यवतमाल में 700 से अधिक पटवारी हड़ताल पर, नागरिकों के कामकाज ठप, लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज

Yavatmal Patwari strike: यवतमाल जिले में 700 से अधिक पटवारियों की सामूहिक हड़ताल। सात-बारा, प्रमाणपत्र और भूमि अभिलेख का काम ठप। प्रशासन को सौंपा ज्ञापन।
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पटवारियों की हड़ताल (सौजन्य-नवभारत)
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Yavatmal Patwari Demands: ग्राम राजस्व अधिकारी (पटवारी) संवर्ग की लंबे समय से लंबित मांगों की ओर प्रशासन द्वारा लगातार उपेक्षा किए जाने के कारण नाराज पटवारियों ने आज 6 जनवरी से सामूहिक अवकाश आंदोलन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन के चलते नागरिकों के राजस्व से जुड़े अनेक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। पिछले कई वर्षों से पटवारी संवर्ग अपने न्यायोचित अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में 2 जनवरी को संगठन के सदस्यों ने स्थानीय समता मैदान में एक दिवसीय आंदोलन कर शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। हालांकि, प्रशासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। प्रशासन पर केवल समयकेंद्रित नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए अंततः पटवारियों ने आंदोलन का मार्ग चुना।

इस सामूहिक अवकाश आंदोलन के कारण सात-बारा (भूमि अभिलेख), विभिन्न प्रमाण-पत्र, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज, तथा प्रशासन को आवश्यक रिपोर्टों का कार्य पूरी तरह प्रभावित हुआ है। प्राकृतिक आपदाओं एवं निर्वाचन कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्य न करने का निर्णय पटवारियों ने लिया है।

सेवा ज्येष्ठता लाभ सहित कई मांगों पर अड़े

पटवारी संवर्ग की प्रमुख मांगों में पिछले 15 वर्षों से अद्यतन न की गई सेवाज्येष्ठता सूची, मंडल अधिकारी पद पर पदोन्नति लंबित रहना, कालबाह्य हो चुके लैपटॉप व प्रिंटर को बदलकर नए उपकरण उपलब्ध कराना, तथा विनंती के आधार पर स्थानांतरण प्रक्रिया लागू करना शामिल है।

इस आंदोलन के दौरान केंद्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण गाढवे, जिला अध्यक्ष भरत पिसे, चेतन ठाकरे, परिमल डोलसकर, सुनील उराडे, प्रकाश कानडे, राजू मानकर और संजय मारकड उपस्थित थे। उन्होने यवतमाल के तहसीलदार डा. योगेश देशमुख को अपनी मांगों का ज्ञापन सौपा।