
दामिनी पथक के साथ प्रियदर्शनी अशोक उईके (सौजन्य-नवभारत)
Yavatmal Municipal President Priyadarshini Uike: साढ़े तीन वर्षों तक प्रशासकीय शासन के कारण यवतमाल नगर पालिका पर राज्य सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण रहा। अब नगराध्यक्ष के पदभार ग्रहण के बाद स्थानीय स्वशासन की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन एक बार फिर ‘देवाभाऊ’ का ही कार्यक्रम यहां लागू होता दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री के ‘100 दिनों के कार्यक्रम’ को यवतमाल नगर पालिका में पहले ही दिन से अमल में लाए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी पांच वर्षों तक पालिका का कामकाज भी ‘आदरणीय, सम्माननीय, माननीय’ जैसे शब्दों की छाया में ही चलता रहेगा। राज्य की सबसे बड़ी नगर पालिका होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने खेमे के मंत्री अशोक उईके की पुत्री को नगराध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया।
इसके बाद स्वयं दो बार यवतमाल आकर प्रचार सभाएं कीं। इसके अलावा अभिनेता खली, अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को भी प्रचार के लिए लाया गया। पूरी पार्टी मशीनरी को सक्रिय कर अंततः अधिवक्ता प्रियदर्शनी अशोक उईके को नगराध्यक्ष चुना गया। नगराध्यक्ष बनने से पहले ही प्रियदर्शनी उईके ने मुख्यमंत्री से भेंट कर यवतमाल में ‘दामिनी पथक’ को सक्रिय करने की मांग रखी।
विशेष बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने तुरंत इस मांग को स्वीकार करते हुए नगराध्यक्ष के पहले ही दिन दामिनी पथक के लिए नया वाहन भेज दिया। इससे यह संकेत मिले हैं कि यवतमाल अब ‘देवाभाऊ’ की लाडली नगर पालिका बनने जा रही है। इसी की दूसरी झलक शुक्रवार को हुए पदभार ग्रहण समारोह में देखने को मिली।
नगराध्यक्ष पद का कार्यभार संभालते ही प्रियदर्शनी उईके ने 100 दिनों का कार्यक्रम घोषित किया। यह कार्यक्रम हूबहू वही है, जो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पद संभालते ही राज्य प्रशासन के लिए घोषित किया था। राज्य स्तर पर हर विभाग को 100 दिनों के लक्ष्य दिए गए थे और हर तीन महीने में उनकी समीक्षा कर कार्यालयों की रैंकिंग घोषित की जाती थी। अब वही मॉडल यवतमाल नगर पालिका में अपनाया जा रहा है। इससे साफ है कि आने वाले समय में ताई के हाथों देवाभाऊ का ही प्रशासन चलता रहेगा।
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यवतमाल जिले की 11 नगर पालिकाओं के चुनाव परिणाम 21 दिसंबर को घोषित हुए थे। अब तक केवल यवतमाल, उमरखेड, पांढरकवडा और घाटंजी में नगराध्यक्षों ने पदभार संभाला है।
पुसद और दिग्रस: 5 जनवरी
आर्णी : 10 जनवरी
वणी और नेर : 12 जनवरी
वहीं दारव्हा के नगराध्यक्ष ने पालकमंत्री के दौरे को ध्यान में रखते हुए मुहूर्त तय करने का निर्णय लिया है। ढाणकी नगर पंचायत के नगराध्यक्ष की तारीख भी अभी तय नहीं हुई है। हालांकि असली राजनीतिक रस्साकशी उपनगराध्यक्ष पद को लेकर शुरू हो चुकी है।






