जांब में टिपेश्वर का नया गेट शुरू (सौजन्य-नवभारत)
Jamb Heti Safari Route: यवतमाल जिले की समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के सतत विकास के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांढरकवड़ा प्रादेशिक वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्व वन दिवस के अवसर पर शनिवार को जांब (हेटी) में नव विकसित पर्यटन सफारी मार्ग का उद्घाटन आर्णी-केलापुर क्षेत्र के विधायक प्रा. राजू तोडसाम के हाथों संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक डॉ. किशोर मानकर, उपवन संरक्षक यशवंत बहाले, सहायक वन संरक्षक विशाल चव्हाण, वन अधिकारी एवं कर्मचारी, जांब के सरपंच रमेश सिडाम, संयुक्त वन प्रबंधन समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे। टिपेश्वर अभयारण्य में बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, भालू, भेड़िया, लोमड़ी जैसे मांसाहारी प्राणी तथा चीतल, नीलगाय, काला हिरण, खरगोश जैसे शाकाहारी प्राणी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
इसके अलावा विविध पक्षी, तितलियां और दुर्लभ वनस्पतियां इस क्षेत्र की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं। इसी प्राकृतिक संपदा को पर्यटन के रूप में विकसित कर स्थानीय जांब, पारवा और इंजाला क्षेत्र के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 37 किलोमीटर लंबा सफारी मार्ग विकसित किया गया है।
सफारी मार्ग पर पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें छह कृत्रिम जलस्रोत तैयार किए गए हैं। जांब (हेटी) में मुख्य प्रवेश द्वार पांढरकवडा से लगभग 16 किलोमीटर तथा यवतमाल से करीब 51 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
वर्तमान में 20 पंजीकृत जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं और केवल इन्हीं वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। साथ ही 15 स्थानीय शिक्षित युवाओं को प्रशिक्षित कर मार्गदर्शक के रूप में नियुक्त किया गया है।
प्रत्येक गुरुवार को सफारी बंद रहेगी तथा सुबह 6 से 10 बजे और दोपहर 2 से 6 बजे तक पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा। प्रवेश द्वार परिसर में टिकट काउंटर, विश्राम सुविधा और अल्पाहार की व्यवस्था की गई है। फिलहाल बुकिंग ऑफलाइन शुरू है, जबकि जल्द ही ऑनलाइन बुकिंग सुविधा शुरू करने की योजना है।
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अपने संबोधन में विधायक राजूभाऊ तोडसाम ने इस उपक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफारी वर्षभर, विशेषकर वर्षा ऋतु में भी चालू रखने के लिए आवश्यक सड़क मरम्मत और जल स्रोतों के विकास हेतु निधि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही जांब तालाब में जल पर्यटन विकसित कर स्थानीय आदिवासी समुदाय को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।