प्राइवेट NEET कोचिंग सेंटरों पर चलेगा सरकार का हथौड़ा! राजस्व मंत्री विखे पाटिल ने की पाबंदी की मांग
NEET Coaching Classes Ban Demand Maharashtra: नीट पेपर लीक के बीच मंत्री विखे पाटिल की बड़ी मांग। निजी कोचिंग क्लासेस पर लगे बैन, कॉलेजों में शुरू हो नीट की पढ़ाई।
- Written By: अनिल सिंह
राधाकृष्ण विखे पाटिल: महाराष्ट्र के हर जूनियर कॉलेज में अनिवार्य होगी NEET की पढ़ाई (फोटो क्रेडिट-X)
NEET Coaching Classes Ban Demand Radhakrishna Vikhe Patil: देशभर में मचे नीट परीक्षा विवाद के बीच अहिल्यानगर में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि निजी कोचिंग संस्थान आज के समय में केवल पैसे कमाने का जरिया और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुके हैं। इन संस्थानों द्वारा माता-पिता से दो से तीन लाख रुपये तक की भारी-भरकम फीस वसूल कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिससे केवल अमीर बच्चों को फायदा मिल रहा है और होनहार ग्रामीण छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।
विखे पाटिल ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि राज्य के कई राजनीतिक रसूखदारों ने अपने आर्ट्स और कॉमर्स कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को निजी कोचिंग संचालकों को ‘आउटसोर्स’ कर दिया है। यह वित्तीय हिस्सेदारी और भ्रष्टाचार का एक नया जरिया बन चुका है। उन्होंने साफ किया कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ध्यान आकर्षित करेंगे और ऐसे सभी कॉलेजों की आधिकारिक मान्यता तुरंत रद्द करने की मांग करेंगे।
कॉलेजों में ही शुरू हो NEET की विशेष कक्षाएं
मंत्री विखे पाटिल ने शिक्षा संकट का समाधान सुझाते हुए कहा कि अगर सरकार राज्य के सभी सरकारी और निजी जूनियर कॉलेजों में नियमित पाठ्यक्रम के साथ ही नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कक्षाएं अनिवार्य कर दे, तो इन कोचिंग माफियाओं का धंधा अपने आप बंद हो जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक-एक कोचिंग क्लास में चार से पांच हजार छात्र पढ़ रहे हैं, तो हमारे स्थापित कॉलेज और वहां का स्टाफ आखिर क्या जिम्मेदारी निभा रहा है?
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शिक्षकों के रवैये और जवाबदेही पर तीखे सवाल
राजस्व मंत्री ने सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के प्राध्यापकों और शिक्षकों की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठन छठे-सातवें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसी मांगें तो मजबूती से रखते हैं, लेकिन जब बात छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की आती है, तो वे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। सरकार इन कॉलेजों पर जनता के टैक्स का करोड़ों रुपया खर्च करती है, इसलिए शिक्षकों को यह सोचना होगा कि छात्र स्कूल-कॉलेज छोड़कर प्राइवेट सेंटरों पर निर्भर क्यों हो रहे हैं।
नीतिगत बदलाव की तैयारी
नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) की देशव्यापी जांच और छापेमारी के बीच विखे पाटिल का यह बयान महाराष्ट्र की शिक्षा नीति में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो आने वाले शैक्षणिक सत्र से निजी कोचिंग के एकाधिकार पर लगाम लग सकती है और सामान्य परिवारों के बच्चों को सीधे कॉलेज स्तर पर ही बेहतरीन प्रतियोगी कोचिंग मिल सकेगी।
