यवतमाल में आरसीसीपीएल कंपनी के खिलाफ भूख हड़ताल की चेतावनी, शिवसेना ने प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

Yavatmal News: यवतमाल झरी-जामनी में नेताजी पारखी व शिवसेना (यूबीटी) ने आरसीसीपीएल सीमेंट कंपनी के खिलाफ 22 सितंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी दी। मांगें पूरी न होने पर कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।
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कंपनी प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता (फोटो नवभारत)
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Yavatmal News In Hindi: यवतमाल जिले के झरी-जामनी तालुका में आरसीसीपीएल सीमेंट कंपनी मुकुटबन के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) और नेताजी पारखी ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। शनिवार को आंदोलनकारियों ने कंपनी के मानव संसाधन प्रमुख जितेंद्र कुर्वे को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे 22 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगे

  • कंपनी में 80% स्थानीय लोगों को नौकरी दी जाए।
  • आसपास की जमीन खरीदकर वहां पर्यावरण के अनुकूल पेड़ लगाए जाएं।
  • प्रभावित किसानों को स्वास्थ्य, पर्यावरण और उत्पादन हानि का मुआवजा नकद में दिया जाए।
  • किसानों के बच्चों को उनकी शिक्षा के अनुसार कंपनी में नौकरी दी जाए।
  • ठेकेदारी प्रणाली खत्म की जाए और भर्ती एजेंसी की नियुक्ति स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कराई जाए।
  • मजदूरों का वेतन बढ़ाया जाए और उन्हें पीएफ व बीमा का लाभ दिया जाए।
  • स्थानीय लोगों को वेंडरशिप (ठेके) दिए जाएं।
  • खनन क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री न रखी जाए।
  • श्रमिकों को सुरक्षा किट दी जाए और पुरानी किट वापस लेकर उसका निपटान किया जाए।
  • भूजल का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए बंद किया जाए और नदी पर छोटे बांध बनाकर पानी का इस्तेमाल किया जाए, ताकि गर्मियों में गांवों को पानी की कमी न हो।
  • नेताजी पारखी और अन्य नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनकारियों की जान को खतरा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

ये अन्य समस्याएं भी

  • ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि रेलवे ट्रैक पर सीमेंट के रैक खड़े रहने से येडशी रोड बार-बार बंद हो जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है।
  • कंपनी जिस क्षेत्र में है, वह वन्यजीवों का इलाका है, इसलिए पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण कानूनों का पालन किया जाए। बाहरी मजदूरों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य किया जाए और राज्य राजमार्गों पर पार्किंग पूरी तरह बंद की जाए।
  • ग्रामीणों की मांग है कि आसपास के गांवों को कंपनी से मुफ्त जल, जंगल और जमीन का अधिकार दिया जाए और भूमिहीन किसानों को कंपनी में स्थायी रोजगार दिया जाए।
  • आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सभी मांगे तुरंत पूरी नहीं की गईं, तो कंपनी के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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