

Yavatmal Crop Insurance Rules Update: पिछले खरीफ सीजन में हजारों किसानों के फसल बीमा दावे खारिज होने और मुआवजे को लेकर भारी नाराजगी के बीच केंद्र और राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की घोषणा की है। इस संबंध में 3 जुलाई को शासनादेश जारी किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करना होगा। सरकार का दावा है कि बदली हुई योजना से प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता के कारण होने वाले फसल नुकसान पर किसानों को अधिक प्रभावी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। यवतमाल जिले में इस वर्ष योजना के क्रियान्वयन और बीमा दावों की जिम्मेदारी इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सौंपी गई है।
नई व्यवस्था में डिजिटल क्रॉप सर्वे को अंतिम आधार माना जाएगा। यदि किसान द्वारा आवेदन में दी गई फसल की जानकारी और डिजिटल सर्वे में दर्ज जानकारी में अंतर पाया गया, तो बीमा आवेदन रद्द किया जा सकता है। इतना ही नहीं, गलत जानकारी देकर या धोखाधड़ी से बीमा लाभ लेने का प्रयास करने वाले किसानों को अगले 5 वर्षों तक विभिन्न कृषि योजनाओं से वंचित रखने का भी प्रावधान किया गया है।
नई योजना के अनुसार अधिसूचित राजस्व मंडल में किसी फसल का औसत उत्पादन निर्धारित उत्पादन सीमा से कम रहने पर ही किसानों को बीमा दावा मिलेगा। योजना में धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, उड़द, तुअर, मक्का, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, कपास तथा खरीफ प्याज सहित कुल 14 फसलों को शामिल किया गया है। किसान नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल, बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) अथवा स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के लिए एग्रीस्टैक पंजीकरण संख्या, भूमि संबंधी दस्तावेज, फसल घोषणा पत्र, आधार कार्ड तथा आधार से लिंक बैंक खाता अनिवार्य होगा। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे कराना भी जरूरी रहेगा। अनाज एवं दलहन फसलों के लिए किसानों को बीमित राशि का 2%, जबकि कपास और प्याज जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए 5% प्रीमियम देना होगा। योजना का लाभ केवल 0.10 हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि रखने वाले किसानों को मिलेगा।
गौरतलब है कि पिछले खरीफ सीजन में यवतमाल जिले के हजारों किसानों के फसल बीमा दावे नामंजूर हो गए थे। कई किसानों को बेहद कम मुआवजा मिला, जबकि डिजिटल फसल पंजीकरण की त्रुटियां, दावों के निस्तारण में देरी और अन्य तकनीकी समस्याओं को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें सामने आई थीं। किसानों ने आंदोलन भी किया था, लेकिन उनकी अधिकांश शिकायतों का समाधान अब तक नहीं हो सका है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि आवेदन भरने से पहले सभी दस्तावेजों और फसल संबंधी जानकारी की सही तरीके से जांच कर लें। किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर बीमा दावा निरस्त किया जा सकता है।
| फसल | बीमित राशि (रुपये/हेक्टेयर) | किसान का प्रीमियम (रुपये) |
| ज्वार | 31,400 | 628 |
| सोयाबीन | 48,000 | 960 |
| मूंग | 28,000 | 560 |
| उड़द | 27,000 | 540 |