

Crude Oil Price Hike After Attack In Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर स्थिति खराब हो गई है। मंगलवार को सऊदी अरब के क्रूड ऑयल टैंकर और कतर के एएलएनजी टैंकर पर हमले हुए। जिसके बाद ब्रेंट क्रूड की प्राईस 2.75 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। होर्मुज में हुए ताजा हमलों से नाराज अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर फिर से बैन लगा दिया है। इससे पहले मंगलावर के दिन तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत की की बढ़ोतरी देखने को मिली। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 74 डॉलर के पार बंद हुआ था। आज बुधवार सुबह कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलएनजी लेकर जा रहा एल रेकायत टैंकर पर उसके बाईं ओर हमला हुआ। एक अन्य सूत्र ने बताया कि इंजन केबिन में आग लगने से टैंकर में विस्फोट का खतरा था। चालक दल सुरक्षित था और उसे निकाला जा रहा था। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान इस हमले के लिए पूरी कानूनी जिम्मेदारी रखता है और उन्होंने ईरानी उप राजदूत को बुलाकर टैंकर पर हमले का विरोध दर्ज कराया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए इन हमलों से अमेरिका और ईरान के बीच जून महीने के आखिरी से चली आ रही वार्ता को बड़ा झटका लगा है। इसी बातचीत के जरिए वाशिंगटन और तेहरान ने तीन महीने के लंबे संघर्ष के बाद इस अहम जलमार्ग को फिर से खोलने पर राजी हुए थे, क्योंकि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में ईंधन आपूर्ति को बुरी तरह से प्रभावित किया था।
इन हमलों से आहत अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में उसके यह कदम पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और उनके नतीजे भुगतने होंगे। गौरतलब है कि जून महीने में दोनों देशों के बीच हुए समझौते में ईरान के ऊपर लगे दशकों पुराने प्रतिबंधों में अमेरिका ने ढील दी थी, ताकि लंबे समय से बंद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जा सके।
तीन महीने से अधिक समय तक युद्ध लड़ने के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी परमाणु मुद्दे और होर्मुज पर उसके कंट्रोल की चाहत को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिका शुरू से ही ईरान को परमाणु क्षमता वाला देश बनने से रोकने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों की पिछले हफ्ते बातचीत की पहली दौर पूरी हुई। हालांकि, वह किसी भी बेहतर नतीजे के ओर नहीं पहुंच सकी। यह कारण है को अब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई स्थाई समझौता नहीं हो सका।
अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (JMIC) ने मंगलवार को हमलों के बाद खतरे के स्तर को महत्वपूर्ण से बढ़ाकर गंभीर कर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में जानबूझकर दुश्मनाना कार्रवाई हो सकती है। 15 जून के बाद पहली बार खतरे का स्तर इतना ऊंचा किया गया है।
यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों से जलमार्ग पर मालवाहक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाएगी या नहीं। 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों से पहले इस रास्ते से दुनिया की लगभग पांचवीं तेल और गैस सप्लाई गुजरती थी।