जन गण मन हमारा मान, पर वंदे मातरम की अनिवार्यता असंवैधानिक, वारिस पठान ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल
AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि वंदे मातरम का सम्मान है लेकिन इसे अनिवार्य करना संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है। उन्होंने बिल की कानूनी बारीकियों पर सवाल उठाए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
वारिस पठान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Waris Pathan AIMIM: भारत सरकार द्वारा वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा देने के फैसले पर अब राजनीतिक विरोध के सुर भी तेज होने लगे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया है। पठान का कहना है कि सम्मान करना और अनिवार्यता थोपना, दोनों अलग बातें हैं।
संविधान देता है धार्मिक स्वतंत्रता
मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए वारिस पठान ने कहा, हम वंदे मातरम का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे अनिवार्य करना या हर किसी के लिए इसे गाना जरूरी बनाना पूरी तरह से असंवैधानिक है। हमारे देश का संविधान अनुच्छेद 25 (Article 25) के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने की स्वतंत्रता देता है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जन गण मन हमारा राष्ट्रगान है और हम इसे पूरे दिलो-जान से गाते हैं और इसका सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी चीज को जबरन थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
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Mumbai, Maharashtra: On the decision in the Union Cabinet meeting to accord Vande Mataram the same status as Jana Gana Mana, AIMIM National Spokesperson Waris Pathan says, “We respect and honour Vande Mataram, but saying that it must be recited in a mandatory way is… pic.twitter.com/Lyfwesm2uc — IANS (@ians_india) May 6, 2026
पूरा बिल पढ़ने के बाद तय करेंगे रणनीति
सरकार द्वारा लाए जा रहे इस नए प्रावधान की कानूनी बारीकियों पर बोलते हुए पठान ने कहा कि जब यह बिल पूरी तरह से सामने आएगा, तभी इसकी मंशा साफ होगी। उन्होंने कहा, जब यह बिल आएगा, तब हम इसे विस्तार से पढ़ेंगे। हमें यह समझने की जरूरत है कि सरकार ने इसमें क्या प्रावधान किए हैं किसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है, किस तरह के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है और इसके पीछे कानूनी तर्क क्या है।
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कानूनी पचड़े की आशंका
वारिस पठान का इशारा उन सजाओं और कानूनी कार्यवाहियों की ओर था जो वंदे मातरम का अपमान करने या इसे न गाने की स्थिति में नागरिकों पर लागू हो सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह के फैसले समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और एक विशेष वर्ग को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
एआईएमआईएम नेता ने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे भावनात्मक मुद्दों के बजाय देश की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल, इस मुद्दे पर छिड़ी बहस ने आगामी सत्र में राजनीतिक घमासान के संकेत दे दिए हैं।
