
प्रतीकात्मक तस्वीर
वर्धा. वर्धा के 4 थे दिवानी न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर पी.एस. कुलकर्णी ने एक अहम फैसला सुनाया़ ससुराल का घर स्वयं छोड़कर नौकरीपेशा महिला को गुजाराभत्ता की राशि न देने का निर्णय दिया. जानकारी के अनुसार वर्धा में निवासी एक दंपत्ति का मामला न्यायालय में चल रहा था.
आवेदनकर्ता का नाम सौरभ (बदला हुआ नाम) तथा आवेदीका सोनल (बदला हुआ नाम) दोनो में अनबन चल रही थी़ महिला अपने पति के साथ रहना नहीं चाहती थी़ परिणामवश महिला ने ससुराल पक्ष का घर छोड़कर हैद्राबाद में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी शुरु कर दी़ इस पर पति द्वारा तलाक की याचिका दायर करने से महिला ने ने पति पर हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 अंतर्गत धारा 24 के तहत 50 हजार रुपये प्रति माह की गुजारा भत्ता की राशि की मांग की याचिका दायर की़ इस पर पति सौरभ की ओर से अधिवक्ता विशाल टीबडेवाल एवं अधिवक्ता बेला टीबडेवाल ने न्यायालय में पक्ष रखा.
उन्होंने कहा कि, महिला सोनल यह स्वयं से ससुराल का घर छोड़कर गयी है. साथ ही हैद्राबाद में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर एक लाख रुपये प्रतिमा वेतन कमा रही है. जबकि पति का वेतन महिला के वेतन से कम है. साथ उन पर परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी है.
इस संबध में उन्होंने न्यायालय में पुख्ता सबुत भी पेश किये. न्यायाधीश कुलकर्णी ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया. साथ ही महिला की याचिका को निरस्त कर दिया. न्यायालय का कहना है कि, महिला द्वारा लगाई गई हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 अंतर्गत धारा 24 अनुसार याचिका को निरस्त करना ही उचित है, ऐसी जानकारी एड. विशाल टीबडेवाल ने दी.






