उद्धव-राज के बीच छिड़ी जंग, विधानसभा चुनाव से पहले टकराव बढ़ने की आशंका
महाराष्ट्र की राजनीति भी अब यूपी-बिहार की तर्ज पर हिंसक होती जा रही है। मुंबई पर दशकों तक राज करनेवाले ठाकरे परिवार के दो उत्तराधिकारियों के बीच पिछले कुछ समय में हुआ वाकयुद्ध और अब काफिले पर हमले से महाराष्ट्र के सियासी घमासान के रक्तरंजित परिणामों की झलक साफ दिखाई दे रही है।
- Written By: शुभम सोनडवले
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (फोटो: ANI)
मुंबई. महाराष्ट्र की राजनीति भी अब यूपी-बिहार की तर्ज पर हिंसक होती जा रही है। विचारों और सवालों से विरोधियों को जवाब देने की बजाय नेताओं की सियासी प्रतिद्वंद्विता अब सड़क की लड़ाई में तब्दील होने लगी है। इसके घातक परिणाम निकट भविष्य में देखने को मिल सकते हैं। इसकी झलक बीते महज एक सप्ताह में कई बार देखने को मिली। महाराष्ट्र खासकर मुंबई पर दशकों तक राज करनेवाले ठाकरे परिवार के दो उत्तराधिकारियों के बीच पिछले कुछ समय में हुआ वाकयुद्ध और अब काफिले पर हमले से महाराष्ट्र के सियासी घमासान के रक्तरंजित परिणामों की झलक साफ दिखाई दे रही है।
शनिवार को उद्धव ठाकरे की ठाणे जिले में सभा होनी थी। वहां जाने के दौरान चेंबूर में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने उद्धव के काफिले पर हमला बोल दिया। मनसे कार्यकर्ताओं ने उद्धव और उनके काफिले में शामिल वाहनों पर चूड़ियां, टमाटर, नारियल और गोबर फेंके। इसी तरह मनसे समर्थकों ने ठाणे में उद्धव के सभास्थल राम गणेश गडकरी हॉल में भी हंगामा किया। मनसे कार्यकर्ताओं के इस कृत्य को शुक्रवार को बीड जिले में राज के काफिले पर सुपारी फेंके जाने की घटना की प्रतिक्रिया बताया जा रहा है। क्योंकि सुपारी फेंकनेवाले शिवसेना (उद्धव गुट) से जुड़े कार्यकर्ता व पदाधिकारी थे। इस घटना के बाद मनसे के ठाणे जिला अध्यक्ष अविनाश जाधव समेत मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद ठाकरे गुट और मनसे के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
शिवसेना ने झाड़ा था पल्ला
राज के काफिले पर हमले के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) ने इस घटना से अपना पल्ला झाड़ लिया था। पार्टी के नेता और सांसद संजय राउत ने कहा था कि राज ठाकरे की कार के सामने विरोध प्रदर्शन से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। उसमें शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता शामिल रहे होंगे लेकिन उस आंदोलन आंदोलन से हमारी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। वह आंदोलन हमारी पार्टी का नहीं था और न ही पार्टी की ऐसी कोई भूमिका है। उस आंदोलन में सभी दलों के कार्यकर्ता मौजूद थे।
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राज ने दी थी चेतावनी
कुछ दिन पहले राज ने सोलापुर में बयान दिया था कि महाराष्ट्र में आरक्षण की जरूरत नहीं है। जिसके बाद मराठा आंदोलनकारियों ने राज के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बताया जा रहा है कि राज के खिलाफ मराठों में भड़के आक्रोश की आड़ में शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने राज के काफिले पर ‘सुपारी’ हमला किया था। जिसके बाद राज ने उद्धव और शरद पवार को बैर मोल न लेने चेतावनी दी थी। राज ने कहा था कि वे विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में उनकी एक भी सभा नहीं होने देंगे।
अब सोशल मीडिया पर शाबासी
अब राज ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उद्धव के काफिले पर हमला करनेवाले अपने कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाई है। राज ने सोशल नेटवर्किक साइट ‘एक्स’ पर पोस्ट में अपना विस्तृत पक्ष रखते हुए लिखा कि मेरी नवनिर्माण यात्रा के दौरान जिस प्रकार धाराशिव से बाधा उत्पन्न करने का प्रयास शुरू हुआ। मराठा आरक्षण आंदोलन के नाम पर प्रदर्शनकारी बताकर नारेबाजी की गई लेकिन बाद में समझ में आया कि इन विरोधियों मराठा आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था। ये सब उद्धव व शरद पवार के कार्यकर्ता थे इसका खुलासा बाद में सोशल मीडिया के कारण हो गया। बीड में उद्धव गुट का जिला अध्यक्ष सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन में शामिल था लेकिन किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसलिए कल ठाणे में उद्धव ठाकरे के काफिले के सामने मेरे महाराष्ट्र के सैनिकों द्वारा किया गया प्रदर्शन गुस्से की प्रतिक्रिया थी। भविष्य में मुझसे और मनसे कार्यकर्ताओं से बैर नहीं लेना ऐसी चेतावनी देते हुए राज ने अपने कार्यकर्ताओं से आव्हान किया है कि जैसे को तैसा नहीं बल्कि दोगुना जवाब क्या होता है, यह आपने दिखा दिया है। अब ये सब रोक दें।
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राउत का अमित शाह पर निशाना
संजय राउत ने कहा कि शनिवार को हुआ हमला दिल्ली के इशारे पर किया गया। दिल्ली का अहमद शाह अब्दाली (अमित शाह) महाराष्ट्र में अराजकता फैलाना चाहता है। इसलिए वह लोगों की सुपारी दे रहा है। आपके (MNS कार्यकर्ताओं) राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है और कुछ नहीं।
क्रिया की प्रतिक्रिया होती है
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “राज ठाकरे के मराठवाड़ा दौरे के दौरान ठाकरे गुट ने इसकी शुरुआत की थी। यह महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा को शोभा देनेवाली हरकत नहीं है। लेकिन पत्थर और सुपारी फेंकना किसी को पसंद नहीं है। अंततः एक्शन का रिएक्शन होता है’। लेकिन, कोई भी इसका समर्थन नहीं करेगा।”
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