Maharashtra MLC Election 2026 का ऐलान, महायुति-मविआ में उम्मीदवारों को लेकर तेज हलचल
Maharashtra MLC Election की 10 सीटों के चुनाव की घोषणा के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। महायुति में सीटों का गणित स्पष्ट है, जबकि मविआ में एक सीट के लिए घमासान मचा हुआ है।
- Written By: अपूर्वा नायक
एकनाथ शिंदे Vs उद्धव ठाकरे (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra MLC Election 2026 Seat Calculation: महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों के लिए चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा कर दी है।
इस घोषणा के साथ ही सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास आघाडी दोनों खेमों में उम्मीदवारी को लेकर जोड़-तोड़ का सिलसिला शुरू हो गया है।विधानसभा में 57 विधायकों के संख्या बल के आधार पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 2 सीटें आसानी से जीतने का मौका है। एक सीट के लिए नीलम गोहें का नाम लगभग तय बताया जा रहा है। वे विधान परिषद की उपसभापति भी रह चुकी हैं।
दूसरी सीट के लिए रविंद्र फाटक, संजय मोरे, किरण पावसकर, शीतल म्हात्रे, शायना एनसी और दीपक सावंत जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। ये वे नेता हैं जो राज्यसभा, लोकसभा या विधानसभा चुनावों में किस्मत आजमा चुके हैं और अब विधान परिषद के जरिए राजनीतिक सक्रियता बनाए रखना चाहते हैं।
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MVA को मिली एक सीट
विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 28 से 29 मतों की जरूरत होगी। इसके आधार पर भाजपा 6 सीटें, शिवसेना (शिंदे) 2 सीटें और राकां (अजीत पवार) 1 सीट जीत सकती है। विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (मविआ) के खाते में केवल 1 सीट आएगी।
उद्धव गुट में भी घमासान
मविआ की एकमात्र सीट के लिए उद्धव ठाकरे गुट से कई नाम सामने आ रहे है। विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता अंबादास दानवे और पार्टी उपनेता सुषमा अंधारे सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इसके अलावा राजन विचारे, विनायक राउत, वैभव नाईक और सूरज चव्हाण भी दावेदारी में हैं। उद्धव ठाकरे खुद विधान परिषद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं और उनके दोबारा चुनाव लड़ने पर स्थिति अभी साफ नहीं है।
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कांग्रेस ने स्पष्ट की भूमिका
उद्धव के विधान परिषद चुनाव लड़ने पर असमंजस की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उद्धव स्वयं उम्मीदवार नहीं होंगे तो वे समर्थन नहीं देंगे। यह पेच महाविकास आघाडी (मविआ) की रणनीति को और उलझा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शिंदे और उद्धव, दोनों खेमों में अंतिम फैसला किसके हक में जाता है?
