
AB Form Controversy:उल्हासनगर में भाजपा (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ulhasnagar BJP: उल्हासनगर शहर भाजपा कमेटी की एक गंभीर तकनीकी चूक सामने आई है, जहां एक ही वार्ड में दो उम्मीदवारों को गलती से पार्टी का एबी फॉर्म जारी कर दिया गया। इस गड़बड़ी के कारण जिस प्रत्याशी को पार्टी अधिकृत रूप से चुनाव मैदान में उतारना चाहती थी, वही अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने को मजबूर हो गई है।
इस भ्रम की स्थिति में जिस दूसरी महिला उम्मीदवार को एबी फॉर्म मिला, उन्होंने समय रहते नामांकन दाखिल कर दिया और उन्हें भाजपा का चुनाव चिह्न ‘कमल’ भी आवंटित हो गया। स्थानीय नेतृत्व द्वारा की गई इस चूक के चलते पार्टी को सार्वजनिक तौर पर किरकिरी का सामना करना पड़ा है।
अन्य राजनीतिक दल से भाजपा में शामिल होकर बाद में पार्टी पदाधिकारी बने बंटी कुरसीजा की पत्नी लक्ष्मी कुरसीजा को इस तकनीकी गलती का प्रत्यक्ष लाभ मिला। उन्हें वार्ड क्रमांक 19 से कमल का निशान मिलने के बाद कुरसीजा परिवार में उत्साह का माहौल है।
हालांकि भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि कमल का निशान मिलने के बावजूद लक्ष्मी कुरसीजा पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी कोमल लहरानी हैं।
पार्टी आदेश की अवहेलना को गंभीर मानते हुए भाजपा ने बंटी कुरसीजा को मंडल अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर पार्टी की वरिष्ठ महिला नेता सिंधु शर्मा को नया मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 19 के लिए बंटी कुरसीजा और उनकी पत्नी लक्ष्मी कुरसीजा को गलती से एबी फॉर्म भेज दिया गया, जिसके आधार पर लक्ष्मी कुरसीजा ने नामांकन दाखिल किया और उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न मिल गया।
इसके बाद भाजपा शहर जिला अध्यक्ष राजेश वधारिया ने स्पष्ट किया कि लक्ष्मी कुरसीजा अधिकृत प्रत्याशी नहीं हैं और पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार कोमल लहरानी ही हैं, जिन्होंने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया है।
पार्टी ने कुरसीजा परिवार से नामांकन वापस लेने का आग्रह भी किया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। लक्ष्मी कुरसीजा ने स्थानीय पत्रकारों से कहा कि वे कमल के निशान पर ही चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी। उन्होंने किसी अन्य दल से भाजपा में आए व्यक्ति की पत्नी को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर नाराज़गी भी जाहिर की।
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गौरतलब है कि इससे पहले पैनल नंबर 1 में शिवसेना (शिंदे गुट) से भाजपा में शामिल हुए बाला श्रीखंडे के मामले में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उल्हासनगर के कुल चार वार्डों में एबी फॉर्म को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे स्थानीय भाजपा नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।






