Dombivli Court Verdict: यौन मंशा साबित नहीं, नाबालिग लड़की मामले में आरोपी बरी
Crime News: ठाणे की विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की का पीछा और यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को यह कहते हुए बरी किया कि उसके कृत्यों से ‘यौन मंशा’ साबित नहीं होती।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे जिला एवं सत्र न्यायालय (सौ. सोशल मीडिया )
Thane News In Hindi: ठाणे की विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की का पीछा करने और उसके यौन उत्पीड़न के आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उसके कृत्यों से ‘यौन मंशा’ प्रकट नहीं होती, जो अपराध साबित करने के लिए आवश्यक तत्व है।
आरोपी मयूरेश कैलास शेलके पेशे से मजदूर है। उस पर आरोप था कि उसने 6 साल पहले जिले के डोंबिवली शहर में 15 वर्षीय पीड़िता के घर में प्रवेश कर उससे अपने प्रेम का इजहार किया था।
न्यायाधीश रूबी यू मालवंकर ने अपने आदेश में कहा कि ‘पीड़िता के साथ कोई शारीरिक संपर्क नहीं हुआ’ और आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘इस मामले के तथ्यों के आलोक में अपने आप में किसी प्रकार की ‘यौन मंशा’ को दशनि वाले नहीं हैं।’
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उन्होंने कहा, “किसे यौन मंशा माना जाए और किसे नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है। मामला वर्ष 2019 में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसका पड़ोसी शेलके एक नवंबर 2019 को डोंबिवली के म्हात्रे नगर स्थित चॉल में उसके घर में उस समय घुस आया, जब वह अकेले थी और पढ़ाई कर रही थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता से कहा था, “मुझे ‘दादा’ मत कहो, मैं तुमसे प्यार करता हूं” वह उसका पीछा करता था तथा बार-बार फोन करता था।
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साक्ष्य प्रस्तुत नहीं
अदालत ने कहा कि कथित घटना एक घनी आबादी वाली चॉल में हुई, इसके बावजूद “किसी भी स्वतंत्र गवाह का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जो इस तरह की घटना को देखने की पुष्टि कर सके। अदालत ने यह रेखांकित किया कि ‘यौनता या यौन मंशा का निर्धारण तथ्य का प्रश्न है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपित अपराधों के कानूनी तत्व साबित करने में विफल रहा। अदालत ने यह स्वीकार किया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। साथ ही यह भी कहा कि दोषसिद्धि के लिए उपलब्ध साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं।
