मुंबई की प्यास बुझाने वाला शाहपुर खुद प्यासा क्यों? बांधों के साये में टैंकरों का इंतज़ार कर रहे आदिवासी
Tribal Area Water Issue: मुंबई को पानी देने वाले शाहपुर तहसील में भीषण जल संकट। बड़े बांधों के बावजूद 200 गांव और पाड़ों में टैंकर से हो रही है जलापूर्ति। पढ़िए ठाणे के इस आदिवासी इलाके की जमीनी हकीकत।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: गोरक्ष पोफली
जलसंकट से परेशन लोग (सोर्स: फाइल फोटो)
Shahapur Water Crisis: शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। कहीं पानी कटौती तो कहीं बिजली कटौती को लेकर हो हल्ला मचा हुआ है। क्या आप जानते हैं कि देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई के नजदीक एक ऐसा भी आदिवासी इलाका है,जो साल भर शहर के करोड़ों लोगों की प्यास तो बुझाता है,परन्तु स्वयं प्यासा रह जाता है। जी हां, मुंबई की प्यास बुझाने वाला ठाणे जिले का सबसे बड़ा तहसील शाहपुर खुद पानी की समस्या से कराह रहा है। महानगर मुंबई की सीमा से सटे ठाणे से मात्र 60 किमी की दूरी पर स्थित शाहपुर इलाके के आदिवासी बहुल सैकड़ों गांव एवं पाड़ो में पानी की समस्या ने विकट रूप धारण कर लिया है।
दीपक तले अंधेरा…
उल्लेखनीय है कि अधिकांश मुंबई एवं ठाणे जैसे बड़े शहरों को शाहपुर से ही पानी की सप्लाई होती है। 2 करोड़ मुंबईकरों की प्यास बुझाने वाले भातसा, तानसा, वैतरणा जैसे बड़े बांध व जलाशय शाहपुर तहसील में ही हैं। इन डैम से पाइपलाइन द्वारा पेयजल ठाणे होते हुए मुंबई में लाया जाता है। लेकिन बांध के आसपास बसे गांव पाड़ों में गर्मी आते ही पानी की समस्या काफी बढ़ जाती है। इन इलाकों में जिला प्रशासन को टैंकर से जलापूर्ति करनी पड़ती है। शाहपुर के दुर्गम पहाडी इलाको में बसे आदिवासी पाड़ों तक टैंकर भी नहीं पहुंच पाता। जिलापरिषद के अनुसार इस समय शाहपुर तालुके के 33 गांवों और 177 पाड़ों में टैंकर से पानी की सप्लाई हो रही है।
पानी के बांध वाले इस तहसील के लाखों लोगों के लिए स्थाई जलापूर्ति व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस तरह पानी की कमी के साथ साथ विकास के अन्य मामलों में पिछड़े शाहपुर में ‘दीपक तले अंधेरा वाली’ कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। बांध के नजदीक ही आदिवासी गांव दापुरमाल में, गांववालों को पानी के लिए मिलों का सफर तय करना पड़ता है। तहसील में बढ़ते सामाजिक असंतुलन को देखते हुए इस इलाके को एमएमआरडीए में शामिल करने की मांग होती रही है।
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क्या कहना है,प्रशासन का ?
बताया गया कि ठाणे ज़िले के 39 गांवों और 137 पाड़ों में ज़िला परिषद की तरफ़ से टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। इस तरीके से 58 हज़ार से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा हो रहा है। पीने के पानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शाहपुर तहसील पर खास ध्यान दिया गया है, जहां जिले में पानी की सबसे ज़्यादा कमी है। शाहपुर तहसील के 33 गांवों और 127 पाड़ों में करीब 52,777 लोगों के लिए 37 प्राइवेट टैंकर लेकर रेगुलर पानी की सप्लाई जारी रखी गई है। साथ ही, मुरबाड़ तालुका के 6 गांवों और 10 पाड़ों में 5,666 लोगों के लिए 3 टैंकरों से पानी की सप्लाई जारी है।
पेयजल सप्लाई को प्राथमिकता – जिप सीईओ
ठाणे जिप के सीईओ रंजीत यादव ने कहा कि “ठाणे जिले के ग्रामीण इलाकों में लोगों को पीने के पानी की सप्लाई करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पानी की कमी वाले इलाकों में टैंकरों से रेगुलर और समय पर पानी की सप्लाई की जा रही है और प्रशासन लगातार हालात पर नज़र रख रहा है। दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सभी सिस्टम तैयार रखे गए हैं।”
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जिले का एकमात्र आदिवासी तालुका
शाहपुर ठाणे जिले का एकमात्र आदिवासी और भौगोलिक दृष्टि से भी सबसे बड़ा तहसील है। पूर्व विधायक पांडुरंग बरोरा के अनुसार इस इलाके के सामाजिक आर्थिक स्थिति में असंतुलन बढ़ रहा है। यदि शाहपुर तहसील को मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया तो यहां पानी के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के साधन बढ़ जाएंगे।
पिछले कुछ वर्षों में यहां जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई है,परंतु विकास योजनाओं एवं संसाधनों की कमी के चलते समस्या भी बढ़ी है। ठाणे-पालघर-रायगढ़ क्षेत्रीय विकास योजना में शाहपुर को शामिल करने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम अधिसूचना में इस तालुका को शामिल नहीं किया गया।
