MBMC corruption allegations (सोर्सः सोशल मीडिया)
MBMC Corruption Allegations: मीरा-भाईंदर शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि जहां कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए था, वहां सफाई कर्मचारियों द्वारा सफेद सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। इस खुलासे ने मनपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय भाजपा पार्षद गणेश शेट्टी ने वार्ड नंबर 3 के निरीक्षण के दौरान इस गड़बड़ी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बोरिक पाउडर आमतौर पर हल्के पीले रंग का होता है, जबकि मौके पर डाला जा रहा पाउडर पूरी तरह सफेद और संदिग्ध था। जांच के दौरान वहां सीमेंट की बोरियां भी पाई गईं, जिनकी तस्वीरें उन्होंने सबूत के तौर पर लीं।
गौरतलब है कि मीरा-भाईंदर महानगरपालिका हर साल मच्छरों, तिलचट्टों और चूहों पर नियंत्रण के लिए कीटनाशकों के छिड़काव पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। ऐसे में सीमेंट का उपयोग न केवल बेअसर है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी माना जा रहा है।
पार्षद शेट्टी ने मनपा के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त सचिन बांगर के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए संबंधित सामग्री को तुरंत हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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वहीं, मनपा प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। स्वच्छता निरीक्षक श्रीकांत परड़कर ने दावा किया कि कहीं भी सीमेंट का छिड़काव नहीं किया गया है और सभी कार्य उपलब्ध स्टॉक से ही किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पिछले तीन महीनों से बोरिक पाउडर का स्टॉक समाप्त है और नई खरीद प्रक्रिया में देरी हुई है।
अब सवाल यह उठता है कि जब कीटनाशक उपलब्ध ही नहीं था, तो छिड़काव के नाम पर आखिर क्या किया जा रहा था? क्या यह केवल लापरवाही है या जानबूझकर किया गया कोई अनियमित कार्य? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है।