नागपुर मनोरुग्णालय में बड़ा फेरबदल! अधीक्षक डॉ. सतीश हुमणे निलंबित, मरीजों की बदहाली पड़ी भारी

Nagpur Mental Hospital News: नागपुर प्रादेशिक मनोरुग्णालय के अधीक्षक डॉ. सतीश हुमणे निलंबित! जांच में खाने, सफाई और OPD टाइमिंग में बड़ी धांधली उजागर। गड़चिरोली भेजे गए डॉक्टर।
Nagpur Mental Hospital Superintendent Dr. Satish Humane suspended over administrative lapses, poor food quality, and OPD timing issues. Sent to Gadchiroli.
नागपुर न्यूज
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Dr. Satish Humane Suspended: प्रादेशिक मनोरुग्णालय में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक गड़बड़ियों और अनियमितताओं के मामले में आखिरकार बड़ी कार्रवाई की गई है। वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. सतीश हुमणे को निलंबित कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के उपसंचालक डॉ. शशिकांत शंभरकर ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के तहत की गई है। निलंबन के बाद डॉ. हुमणे को जिला अस्पताल, गड़चिरोली में स्थानांतरित किया गया है। वहीं वैद्यकीय उप-अधीक्षक डॉ. अमरीश मोहबे को अस्पताल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

जांच में अस्पताल प्रशासन की कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं जिनमें स्वच्छता व्यवस्था में लापरवाही, भोजन आपूर्ति में गड़बड़ी और खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी शामिल है। सभी संबंधित अधिकारियों पर महाराष्ट्र नागरी सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के बावजूद ओपीडी पूरे समय संचालित नहीं की जा रही थी।

जहां ओपीडी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुली रहनी चाहिए थी वहीं यह केवल दोपहर 1 बजे तक ही चल रही थी। मरीजों को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं जैसे तेल, साबुन और दंतमंजन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक सामग्री के बीच भी स्पष्ट अंतर पाया गया।

मंत्री के निरीक्षण में उजागर हुई थीं खामियां

अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था बेहद खराब पाई गई। नियमों के अनुसार दिन में 3 बार सफाई की जानी चाहिए लेकिन व्यवहार में यह एक बार ही की जा रही थी। कई कर्मचारी अनुपस्थित रहते थे, जबकि भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा था। 13 दिसंबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण में भोजन की गुणवत्ता खराब पाई गई थी। कुछ वार्डों में मरीजों को जमीन पर सोते हुए देखा गया, जबकि रसोई व्यवस्था भी अस्त-व्यस्त थी।

इसके अलावा आपूर्तिकर्ताओं को अधिक भुगतान और दवा खरीद में नियमों के उल्लंघन के आरोप भी जांच में सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई कार्यों में तकनीकी स्वीकृति तो ली गई लेकिन आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई। साथ ही 1 दिसंबर 2016 के सरकारी खरीद नियमों का पालन भी नहीं किया गया।

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