
कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: महानगर पालिका चुनाव के नतीजों के बाद सत्ता स्थापित करने को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है।
लेकिन महापौर पद किसके पास जाएगा, इसे लेकर अब महायुति के घटक दल भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) आमने-सामने नजर आ रहे हैं। दोनों ही दल अपना-अपना दावा मजबूती से रख रहे हैं, जिससे सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।
केडीएमसी में महायुति को कुल 102 सीटें मिली हैं। इनमें भाजपा के 50 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 53 नगरसेवक चुने गए हैं। महापौर पद हासिल करने के लिए भाजपा को 12 अतिरिक्त नगरसेवकों, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 9 नगरसेवकों के समर्थन की जरूरत है। इसी कारण अन्य दलों के कुछ नगरसेवकों को अपने पाले में लाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र पवार ने साफ तौर पर कहा है कि महापौर पद की पहली ढ़ाई साल की अवधि भाजपा को मिलनी चाहिए, उनके इस बयान के बाद महायुति के भीतर अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
इस बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के जिला प्रमुख गोपाल लांडगे ने महापौर पद पर अपनी पार्टी की दावेदारी को मजबूती से रखा है। उन्होंने कहा कि महापौर महायुति का ही होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। गोपाल लांडगे ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय शिवसेना प्रमुख एवं डीसीएम एकनाथ शिंदे और स्थानीय सांसद डॉ। श्रीकांत शिंदे लेंगे। उन्होंने कहा, “चुनाव में जनता ने हमें सबसे अधिक संख्याबल दिया है, इसलिए लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार महापौर पद पर पहला अधिकार हमारा बनता है।
भाजपा और शिंदे गुट की नजरें विपक्ष के 19 नगरसेवकों पर टिकी हैं। इनमें कांग्रेस के – 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) का 1 नगरसेवक शामिल है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की दो नगरसेविकाओं में से एक और राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) का नगरसेवक फिलहाल ‘नॉट रिचेबल’ हैं और इनके – शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में होने की चर्चा है।
महापौर पद की इस खींचतान के बीच पर्दे के पीछे राजनीतिक गतिविधियां भी तेजी से चल रही हैं। भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र पवार ने दावा किया है कि मनसे और शिवसेना (ठाकरे गुट) के कई नगरसेवक भाजपा के संपर्क में हैं। इस दावे के बाद विरोधी खेमों में चिंता बढ़ गई है। संभावित टूट-फूट को रोकने के लिए शिवसेना (ठाकरे गुट) ने अपने 11 में से 9 नगरसेवकों को अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। वहीं मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने भी अपने 5 नगरसेवकों को सुरक्षित स्थान पर रखा है। ठाकरे गुट के चुनाव चिह्न पर जीतने के बावजूद मनसे से जुड़े 2 नगरसेवक भी इसी समूह में शामिल हैं, जिससे कुल 7 नगरसेवक एक साथ रखे गए हैं।
इसी बीच शिवसेना (यूबीटी। के जिला प्रमुख शरद पाटिल ने कल्याण पूर्व के अपनी पार्टी के जीते उम्मीदवारों मधुर म्हात्रे और कीर्ति ढोणे को नोटिस जारी किया है। दोनों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की जानकारी सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
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इन सभी घटनाक्रमों के बीच 22 जनवरी को सुबह 11 बजे केडीएमसी महापौर पद के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि महापौर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा और किस दल की दावेदारी मजबूत होगी। कुल मिलाकर, केडीएमसी में सत्ता भले ही महायुति के पास हो, लेकिन महापौर की कुर्सी को लेकर जारी खींचतान ने राजनीति को गरमा दिया है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि महायुति के भीतर सहमति बनती है या फिर सियासी ‘गेम’ कोई नया मोड़ लेता है।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए एचपी तिवारी की रिपोर्ट






