
Eknath Shind:महाराष्ट्र के निकाय चुनावों (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Municipal Elections: महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों में ठाणे जिले को छोड़कर अन्य स्थानों पर शिवसेना (शिंदे गुट) को अपेक्षा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी। पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की चिंता बढ़ गई है। डीसीएम शिंदे इसके लिए संबंधित नेताओं को जिम्मेदार मान रहे हैं। शिवसेना के सूत्रों का दावा है कि कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओं और मंत्रियों पर शिंदे की नाराजगी की गाज गिर सकती है। खासकर कुछ मंत्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
राज्यभर में 29 नगर निगमों के चुनाव संपन्न हुए, जिनमें भाजपा को अच्छी सफलता मिली है। हालांकि मुंबई, पुणे सहित कई अन्य महत्वपूर्ण महानगरपालिकाओं में शिवसेना (शिंदे गुट) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। मुंबई महानगरपालिका में 90 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली शिवसेना को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के केवल 28 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर पाए, जबकि चुनाव से पहले शिंदे गुट के पास करीब 60 पूर्व नगरसेवक थे।
इसके अलावा छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी और कोल्हापुर जैसी नगरपालिकाओं में भी शिवसेना का स्ट्राइक रेट कमजोर रहा। छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना का वर्षों से भावनात्मक जुड़ाव रहा है और वहां एकजुट शिवसेना की सत्ता भी रह चुकी है, लेकिन इस बार भाजपा के साथ गठबंधन टूटने के बावजूद पार्टी को बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, डीसीएम शिंदे अब पार्टी में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ यानी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रहे हैं। शिंदे अकुशल मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटा सकते हैं, जबकि कार्यकुशल मंत्रियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपे जाने की संभावना है। पार्टी के चार मंत्रियों पर शिंदे की नाराजगी की अटकलें तेज हो गई हैं। इनमें कोल्हापुर में योजना मंडल के अध्यक्ष राजेश क्षीरसागर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, जालना नगर पालिका चुनाव में विधायक एवं अनुमान समिति के अध्यक्ष अर्जुन खोतकर और छत्रपति संभाजीनगर के पालकमंत्री संजय शिरसाट के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
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दावा किया जा रहा है कि शिंदे इन चारों नेताओं से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने से वे नाराज हैं। इसी वजह से इन नेताओं से मंत्री पद छीने जाने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले समय में मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह मिल सकती है, जिससे इच्छुक विधायक तैयारी में जुट गए हैं।






