sugar mill payment crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
FRP Dues Solapur: सोलापुर जिले में चीनी मिलों का पेराई सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है। यदि 10 से 15 मिलों का सीजन बंद होता है, तो बाकी मिलों के बंद होने की भी संभावना है। हालांकि, गन्ना उत्पादक किसान दहशत में हैं, क्योंकि मिलों ने किसानों के गन्ने का बड़ी मात्रा में बकाया नहीं चुकाया है। जिले की मिलों पर करीब 500 करोड़ रुपये का गन्ना बकाया है।
पिछले कुछ वर्षों में सोलापुर जिले में गन्ना मिलर्स द्वारा किसानों के पैसों का संगठित तरीके से शोषण किए जाने के आरोप लग रहे हैं। राज्य के शुगर एक्ट के मुताबिक, कटाई के 15 दिनों के भीतर किसानों को उनके गन्ने का भुगतान करना अनिवार्य है। इस नियम के तहत बकाया रकम पर ब्याज देना भी शामिल है, यदि भुगतान में देरी होती है। लेकिन सोलापुर जिले में चीनी मिलर्स ने एक मजबूत व्यवस्था बना ली है।
कुछ मामलों को छोड़कर, मिलर्स सीजन की शुरुआत में किसानों को समय पर भुगतान करते हैं, लेकिन सीजन के बीच में किसानों का बकाया बढ़ने लगता है। शुरुआत में किसानों को पूरे गन्ने का पैसा दिया जाता है, जबकि सीजन के बीच में आने वाले किसानों को आधा भुगतान मिलता है। वहीं, सीजन के अंतिम दौर में आने वाले गन्ना किसानों को कई बार एक पैसा भी नहीं मिलता।
श्रीपुर की पांडुरंग कोऑपरेटिव और पिंपलनेर की श्री विट्ठलराव शिंदे कोऑपरेटिव फैक्ट्री किसानों को समय पर भुगतान कर रही हैं। वहीं, यह जानकारी भी सामने आई है कि बाबूराव बोत्रे-पाटिल के ओमकार ग्रुप द्वारा संचालित फैक्ट्री ने भी किसानों का गन्ना भुगतान कर दिया है। हालांकि, बाकी फैक्ट्रियों पर किसानों का बड़ा बकाया बाकी है। आरोप है कि प्रशासन भी राजनीतिक दबाव में बेबस नजर आ रहा है, क्योंकि जिले के अधिकांश उद्योगपति सत्ताधारी दल से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी वजह से बकाया FRP के मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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