नागपुर में गूंजेगी राफेल की दहाड़, 96 लड़ाकू विमानों का होगा स्वदेशी निर्माण, रक्षा क्षेत्र में भरी नई उड़ान!
Rafale Production Nagpur: नागपुर बनेगा राफेल का ग्लोबल हब! 114 में से 96 विमान नागपुर में तैयार होंगे। डसॉल्ट एविएशन और भारत की इस मेगा डील से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा।
- Written By: प्रिया जैस
राफेल (सौजन्य-IANS)
Dassault Aviation DRAL Nagpur: नागपुर में यह पहली बार होगा जब डसॉल्ट एविएशन का राफेल इतनी बड़ी संख्या में फ्रांस के बाहर असेंबल किया जाएगा। करीब 18 विमान सीधे फ्रांस से फ्लाई-अवे हालत में देश को दिए जाएंगे। ताकि स्थानीय प्रोडक्शन पूरी गति पकड़ने तक वायुसेना की जरूरतें पूरी होती रहे।
भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद करने जा रहा है। इससे देश की वायुसेना के साथ वैश्विक रक्षा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस सौदे के तहत 114 में से लगभग 96 विमान नागपुर स्थित डसॉल्ट एविएशन प्लांट में तैयार किए जाएंगे। करीब 18 विमान सीधे फ्रांस से फ्लाई-अवे हालत में भारत को दिए जाएंगे।
इंडिया में पहले से बना रहा राफेल के पुर्जे
नागपुर के डीआरएएल प्लांट पहले से राफेल के पुर्जे और कंपोनेंट बना रहा है। अब इसे एक पूर्ण फाइनल असेंबली लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह दूसरी प्रोडक्शन लाइन केवल भारतीय वायुसेना के ऑर्डर को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि आने वाले समय में दूसरे देशों को निर्यात किए जाने वाले राफेल भी यहां से बनाए जा सकते हैं।
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दिसंबर 2025 तक राफेल विमानों का कुल बैकलॉग 220 था। इनमें 175 निर्यात ग्राहकों के लिए और 45 फ्रांस की सेनाओं के लिए थे। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 26 विमानों की डिलीवरी की गई। लेकिन नए ऑर्डर लगातार मिलने से प्रोडक्शन पर दबाव बना हुआ है। भारत के 114 विमानों के जुड़ने के बाद यह बैकलॉग 330 या उससे अधिक हो सकता है।
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60 तक पहुंच सकती है संख्या
इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत और साफ हो जाती है। अगर 2031 के बाद फ्रांस और भारत दोनों जगह पूरी क्षमता से प्रोडक्शन शुरू होता है। तो सालाना लगभग 50 राफेल तैयार किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह संख्या 60 तक भी पहुंच सकती है।
स्थानीय असेंबली से देश को उन्नत तकनीक का हस्तांतरण, हाई-टेक क्षेत्र में रोजगार और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। नागपुर में बनने वाले राफेल भविष्य में मेड विद इंडिया पहचान के साथ वैश्विक बाजार में भी उतर सकते हैं। इससे भारत एक बड़े रक्षा निर्माण साझेदार के रूप में आगे आ सकता है।
