एआईएमआईएम प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

इम्तियाज जलील बोले- सड़क से सदन तक लड़ेंगे, मुस्लिम आरक्षण रद्द, एआईएमआईएम का सरकार पर हमला

Sambhajinagar Reservation Issue: महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द होने पर एआईएमआईएम प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील ने सरकार पर हमला बोला और कहा कि इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक संघर्ष होगा।

अंकिता पटेल

Chhatrapati Sambhajinagar Reservation Issue: छत्रपति संभाजीनगर महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुस्लिम समाज को दिए गए पांच प्रतिशत आरक्षण को रद्द करने के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। एआईएमआईएम के प्रदेशाध्यक्ष तथा पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने पत्रकार परिषद में राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह निर्णय मुस्लिम समाज के साथ अन्याय है और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगी।

इम्तियाज जलील ने कहा कि अब तक गठित विभिन्न आयोगों और समितियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मुस्लिम समाज शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा है। ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी थी कि इन रिपोटों को आधार बनाकर ठोस कानून बनाया जाता।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में न्यायालय के फैसले के आधार पर पांच प्रतिशत आरक्षण लागू हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे विधायी संरक्षण नहीं दिया। यदि उस समय कानून बनाया जाता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पर भी सवाल खड़े किए, उनका कहना था कि इन दलों ने सार्वजनिक रूप से मुस्लिम आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन इसे स्थायी कानूनी रूप देने के लिए अपेक्षित राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।

संख्या बल का हवाला देकर मुस्लिम समाज को आरक्षण से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी से किसी समाज का भला नहीं होता। जलील ने कहा कि जिस प्रकार मराठा समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है, उसी प्रकार मुस्लिम समाज के अनेक वर्ग भी अवसरों की कमी से जूझ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी धर्मगुरुओं और संगठनों को एकजुट होकर आरक्षण के लिए आवाज उठानी चाहिए, उन्होंने बीड में चुनाव के दौरान एक विशेष दल का समर्थन करने वाले धार्मिक नेताओं से भी अपील की कि वे अब इस मुद्दे पर खुलकर सामने आएं।

जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा यह कहे जाने पर कि यह निर्णय न्यायालय का है, जलील ने कहा कि सरकार केवल अदालत के फैसले का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। यदि सरकार गंभीर होती तो पहले ही अध्ययन कर व्यापक कानून बनाती। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की सोच दलित और मुस्लिम समाज के प्रति समान नहीं रही है।

खान पान के मुद्दों को दे रहे तूल

जलील ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में मुस्लिम समाज को बार बार विभिन्न मुद्दों पर निशाना बनाया गया है। कभी हिजाब का विवाद उठाया जाता है। कभी धार्मिक स्थलों को लेकर प्रश्न खड़े किए जाते हैं।

तो कभी खानपान के मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जाता है। इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। अन्य राजनीतिक दलों के उभार पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर दल को विस्तार का अधिकार है, लेकिन इससे एआईएमआईएम की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर उनकी पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ी तो व्यापक जनआंदोलन भी किया जाएगा।

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