

Nafisa Begum Death News: महाराष्ट्र की राजनीति और सिल्लोड क्षेत्र के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कद्दावर नेता, विधायक और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार की पत्नी नफीसा बेगम का निधन हो गया है। वे पिछले कुछ महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही समूचे छत्रपति संभाजीनगर जिले और विशेषकर सिल्लोड निर्वाचन क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
नफीसा बेगम का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही थी। तमाम कोशिशों और दुआओं के बावजूद, उन्होंने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। सत्तार परिवार के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि नफीसा बेगम परिवार की रीढ़ होने के साथ-साथ विधायक सत्तार की राजनीतिक यात्रा में भी उनकी सबसे बड़ी ताकत थीं।
नफीसा बेगम केवल एक विधायक की पत्नी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने सिल्लोड की स्थानीय राजनीति में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई थी। उन्होंने सिल्लोड नगर परिषद के नगराध्यक्ष (Mayor) पद की जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी। उनके कार्यकाल को आज भी शहर के विकास कार्यों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए याद किया जाता है। स्थानीय लोगों के बीच वे एक सहज, मिलनसार और संवेदनशील नेता के रूप में लोकप्रिय थीं, जो हमेशा जनसमस्याओं को सुलझाने के लिए तत्पर रहती थीं।
पिछले कुछ समय से नफीसा बेगम की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विधायक अब्दुल सत्तार ने उनके इलाज के लिए अपनी राजनीतिक व्यस्तताओं से समय निकालकर लगातार उनकी देखभाल की। उनके निधन से न केवल उनके बेटे और बेटियों बल्कि हजारों समर्थकों का सिर से साया उठ गया है। समर्थकों का कहना है कि नफीसा ताई हमेशा एक अभिभावक की तरह कार्यकर्ताओं का ख्याल रखती थीं।
नफीसा बेगम का अंतिम संस्कार आज सुबह 10 बजे सिल्लोड में पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
अंतिम दर्शन: उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ हजारों की संख्या में सिल्लोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लोग उमड़ पड़े।
नेताओं की उपस्थिति: शिंदे सेना के कई वरिष्ठ मंत्रियों, सांसदों और विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सिल्लोड पहुँचकर अब्दुल सत्तार को सांत्वना दी और शोक व्यक्त किया।
स्थानीय श्रद्धांजलि: स्थानीय व्यापारियों ने उनके सम्मान में सिल्लोड के कुछ हिस्सों में स्वतः स्फूर्त बंद रखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।