अकोला में भारी बवाल: बीजेपी ने हटाया 'टीपू सुल्तान' का बोर्ड, सभागृह को दिया 'धर्मवीर संभाजी महाराज' का नाम

Akola Tipu Sultan Board Removed: अकोला नगर निगम में बीजेपी ने टीपू सुल्तान का बोर्ड हटाकर संभाजी महाराज का बोर्ड लगाया। शिंदे गुट ने नाम बदलने के लिए प्रशासन को सौंपा निवेदन।
Akola Tipu Sultan Board Removed
Akola Tipu Sultan Board Removed (फोटो क्रेडिट-X)
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Akola Municipal Corporation Controversy: महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान के नाम को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब अकोला तक पहुँच गया है। अकोला महानगरपालिका (NMC) के मुख्य सभागृह के नामकरण को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। सोमवार को भाजपा पार्षद पवन महल्ले और उनके समर्थकों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सभागृह के बाहर लगे 'टीपू सुल्तान' के बोर्ड को हटा दिया और उसकी जगह 'धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज' के नाम का नया बोर्ड लगा दिया।

गौरतलब है कि साल 2012 में इस सभागृह का नाम आधिकारिक रूप से टीपू सुल्तान रखा गया था। लेकिन वर्तमान में राज्य भर में चल रहे टीपू सुल्तान बनाम शिवाजी महाराज विवाद के बीच भाजपा ने अकोला में इस नाम को हटाने के लिए सीधा एक्शन लिया है, जिससे शहर का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

2012 से चला आ रहा विवाद और भाजपा का 'एक्शन'

अकोला महानगरपालिका के मुख्य सभागृह का नाम 'टीपू सुल्तान' रखने का निर्णय करीब 14 साल पहले लिया गया था, जिसका भाजपा लंबे समय से विरोध कर रही थी। हाल ही में मालेगांव और संभाजीनगर में हुए टीपू सुल्तान विवाद के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे अस्मिता की लड़ाई बना लिया। पवन महल्ले और उनके समर्थकों का कहना है कि किसी भी सरकारी संस्थान का नाम उस व्यक्तित्व के नाम पर नहीं होना चाहिए जो विवादित हो। बिना किसी प्रशासनिक आदेश का इंतजार किए, कार्यकर्ताओं ने खुद ही बोर्ड बदलकर इसे ऐतिहासिक सुधार करार दिया।

शिंदे गुट की मांग: संभाजी महाराज या अब्दुल कलाम

इस विवाद में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी कूद पड़ी है। शिवसेना (शिंदे गुट) के महानगर प्रमुख राजेश मिश्रा ने नगर निगम प्रशासन को एक आधिकारिक निवेदन सौंपा है। उनकी मांग है कि सभागृह का नाम या तो छत्रपति संभाजी महाराज के नाम पर रखा जाए या फिर मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर। शिंदे गुट का तर्क है कि नामकरण ऐसा होना चाहिए जो सर्वसमावेशी हो और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बने।

प्रशासनिक दुविधा और संभावित तनाव

अकोला में भाजपा के इस कदम के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

प्रशासन की स्थिति: नगर निगम प्रशासन फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की भूमिका में है, क्योंकि 2012 का प्रस्ताव आधिकारिक था और उसे बदलने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

सियासी घमासान: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा के इस कृत्य को 'गुंडागर्दी' बताया है, जबकि भाजपा इसे जनता की भावना बता रही है।

भविष्य की सुगबुगाहट: शहर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस नए बोर्ड को हटाएगा या आधिकारिक तौर पर नाम बदलने का प्रस्ताव पारित करेगा।

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