
पुणे महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
PMC Tender Controversy: पुणे में देवाची उरूली स्थित कचरा डिपो में जमा लगभग 28 लाख मैट्रिक टन पुराने सड़े गले कचरे के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के लिए पुणे महानगरपालिका प्रशासन द्वारा जारी पांच अलग-अलग टेंडर के लिए कुल 38 बोलियां प्राप्त हुई हैं। ये 38 टेंडर 18 ठेकेदार कंपनियों द्वारा भरी गई हैं। लेकिन इन 18 ठेकेदार कंपनियों में से 11 कंपनियों को कचरा प्रसंस्करण का कोई अनुभव ही नहीं है।
वहीं शेष 7 कंपनियों में से चार से पांच कंपनियों पर विभिन्न राज्यों की परियोजनाओं में ठीक से काम नहीं करने को लेकर कार्रवाई हो चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि पुणे महानगरपालिका ने हाई कोर्ट के निर्देशों को दरकिनार करते हुए टेंडर की शर्तों में बदलाव किसके लिए और क्यों किया है?
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशानुसार देवाची उरुली स्थित लगभग 163 एकड़ के कचरा डिपो से पुराना कचरा हटाने का काम जारी है। अब तक लगभग 20 लाख टन कचरे का प्रसंस्करण करके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है।
पहले पीएमसी ने ठेकेदार कंपनियों की आर्थिक क्षमता, अनुभव और प्लास्टिक तथा तत्सम कचरे को आरडीएफ (ईंधन) में बदलने की शर्त रखी थी, जिसका उपयोग सीमेट और ऊर्जा उत्पादन में होता है। इस प्रक्रिया के लिए ठेकेदार को लगभग 970 प्रति टन टिपिग फीस दी जाती थी। यह काम वर्तमान में भूमि ग्रीन एनजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
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अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त पवनीत कौर ने कहा कि बायोमाइनिंग की पांच स्वतंत्र टेंडर के लिए 38 बोलियां प्राप्त हुई है। ये टेंडर दिशानिर्देशों के अनुसार निकाली गई है। इनकी तकनीकी जांच की जाएगी, जिन ठेकेदारों ने कचरा प्रसंस्करण का बिल्कुल भी काम नहीं किया है, उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा। टेंडरदाताओं के पास बायोमाइनिंग प्रक्रिया और उससे उत्पन्न उत्पादों के निपटान के लिए कौन सी तकनीक है, इसका आयुक्त के समक्ष प्रेजेंटेशन होगा।






