

LPG Storage India: देश में गहराते एलपीजी संकट (LPG Crisis) के बीच राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार की नीतियों और तैयारियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप है कि सरकार वैश्विक संकटों से निपटने के लिए बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर उसकी तैयारियां बेहद कमजोर और 'आत्ममुग्ध' नजर आ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि गैस और ईंधन की यह कमी न केवल आम जनता की रसोई को प्रभावित करेगी, बल्कि होटलों और छोटे व्यवसायों को बंद करने पर मजबूर कर देगी, जिससे देश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का संकट पैदा हो सकता है।
सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर निशाना साधते हुए कहा कि शांतिपूर्ण समय में सरकार द्वारा किए गए वादे अब 'जुमले' साबित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री ने युद्ध शुरू होने से ठीक पहले इजरायल का दौरा किया था और वैश्विक नेता लगातार चेतावनी दे रहे थे, तो भारत सरकार ने पहले से बैकअप प्लान क्यों नहीं तैयार किया?
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और रणनीतिक दूरदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को एलपीजी संकट को सुलझाने के लिए अमेरिका और इजरायल पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार संकट के समय हाथ खड़े कर रही है और कह रही है कि वह मदद नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई चेतावनियों के बावजूद सरकार सोती रही। सांसद के मुताबिक, यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में थी और वास्तविक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के खतरों को भांपने में पूरी तरह विफल रही है।
विपक्ष के हमलों के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत ने अल्पकालिक संकटों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार किया है:
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR): सरकार ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता की रणनीतिक सुविधाएं बनाई हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में 9.5 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत को पूरा कर सकती हैं।
तेल कंपनियों का स्टॉक: तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास वर्तमान में 64.5 दिनों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडारण मौजूद है।
कुल राष्ट्रीय क्षमता: सरकार के मुताबिक, वर्तमान में देश के पास कुल 74 दिनों की राष्ट्रीय भंडारण क्षमता है, जो किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान एक बफर के रूप में काम करेगी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार के आंकड़ों पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि केवल भंडारण क्षमता बता देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अगर सप्लाई चेन में सुधार नहीं हुआ, तो पेट्रोल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने चिंता जताई कि होटल उद्योग, जो पहले से ही 20 प्रतिशत बंद होने की कगार पर है, अगर पूरी तरह ठप हो गया, तो सेवा क्षेत्र (Service Sector) में काम करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार केवल बफर स्टॉक के भरोसे न रहकर गैस की सुचारू आपूर्ति के लिए तत्काल युद्ध स्तर पर कदम उठाए।