SSC Maths Paper Leak Telegram प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
SSC Maths Paper Leak Telegram: पुणे में चल रही एसएससी (SSC) बोर्ड की परीक्षाओं के बीच एक बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है, जिसने राज्य के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। नागपुर के बाद अब ‘विद्या के मायके’ कहे जाने वाले पुणे में दसवीं कक्षा का गणित का प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) होने की घटना उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही गणित भाग-1 और भाग-2 के प्रश्नपत्र एक टेलीग्राम ग्रुप पर प्रसारित कर दिए गए थे। इस घटना ने राज्य शिक्षा बोर्ड के ‘कॉपी-मुक्त’ अभियान के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गणित भाग-2 का पेपर परीक्षा से तीन दिन पहले ही टेलीग्राम ग्रुप पर साझा कर दिया गया था। जैसे ही यह मामला बोर्ड के संज्ञान में आया, पुणे मंडल के अधिकारियों ने इन वायरल प्रश्नपत्रों की तुलना आधिकारिक प्रतियों से की। मिलान करने पर पुष्टि हुई कि टेलीग्राम पर प्रसारित पेपर असली बोर्ड प्रश्नपत्र ही थे। इस पुष्टि के बाद पुणे विभागीय बोर्ड ने शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों और टेलीग्राम ग्रुप एडमिन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने प्रश्नपत्र लीक करने और उसे बड़े पैमाने पर फैलाने के लिए टेलीग्राम (Telegram) ऐप का सहारा लिया। एक विशेष ग्रुप बनाकर उसमें गणित के दोनों प्रश्नपत्र अपलोड किए गए थे। बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम हो सकता है जो तकनीक का उपयोग कर बोर्ड की गोपनीयता में सेंध लगा रहा है। पुलिस अब उस आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबरों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, जिनके जरिए ये दस्तावेज पहली बार अपलोड किए गए थे।
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पुणे बोर्ड की शिकायत के आधार पर पुलिस ने टेलीग्राम ग्रुप के एडमिन और उससे जुड़े सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। शिवाजीनगर पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह पेपर किस केंद्र या प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ है। पुलिस इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए उन छात्रों और अभिभावकों से भी पूछताछ कर सकती है जिन्होंने इस ग्रुप से जानकारी प्राप्त की थी। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। पालकों का आरोप है कि सरकार और बोर्ड केवल ‘कॉपी-मुक्त’ अभियान की बातें करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मेहनत करने वाले छात्रों को डर है कि इस घटना के कारण या तो उनकी परीक्षा दोबारा ली जाएगी या फिर मेरिट लिस्ट प्रभावित होगी। सोशल मीडिया पर भी लोग बोर्ड की कार्यप्रणाली की आलोचना कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।