
अजित पवार और रोहित पवार (सौ. सोशल मीडिया )
Rohit Pawar On Ajit Pawar Death: उपमुख्यमंत्री अजित पवार के एक विमान दुर्घटना में हुए आकस्मिक निधन ने पूरे राज्य को गहरे सदमे में डाल दिया है।
विकास के प्रति समर्पित और आम जनता के कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रसिद्ध एक कद्दावर नेता के इस तरह अचानक चले जाने से हर आंख नम है।
सुबह 6 बजे से जनता की सेवा में जुट जाने वाले और प्रशासन पर अपनी कड़ी पकड़ रखने वाले अजित पवार के जाने से कार्यकर्ताओं से लेकर दिग्गज नेताओं तक, हर कोई अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहा है। इस दुखद घड़ी में उनके भतीजे और विधायक रोहित पवार ने एक बेहद भावुक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की है, जो पूरे महाराष्ट्र में वायरल हो रही है।
रोहित ने लिखा है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस क्षेत्र में अजित पवार ने विकास के फूलों की बागवानी की, वहीं एक दिन उनकी अस्थियां चुनने का समय आएगा। उन्होंने नियति के इस क्रूर खेल पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब से यह खबर आई है, तब से दिमाग सुन्न पड़ गया है और मन बर्फ की तरह जम गया है।
रोहित लिखते हैं कि पिछले कुछ दिनों में उनके बीच हुई भावनात्मक चर्चाएं अब किसी टेप रिकॉर्डर की तरह कानों में गूंज रही हैं और ऐसा महसूस हो रहा है जैसे दादा अदृश्य रूप में अभी भी बात कर रहे हैं।
दादा की कार्यशैली, राजनीति पर उनकी मजबूत पकड़, उनका स्पष्टवादी स्वभाव और बिना किसी लाग-लपेट के काम करने का तरीका हमेशा सबको अचंभित करता था। सत्ता में हों या न हों, उनका एक अलग ही दबदबा और आदरयुक्त डर हमेशा बना रहता था।
रोहित के अनुसार, जो लोग अजित पवार को नहीं जानते थे, उन्हें वे कटहल की तरह बाहर से कठोर लगते थे, लेकिन उनके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति उनके भीतर के मधुर और रसीले स्वभाव का कायल हो जाता था।
मा. अजितदादांनी जिथं विकासरुपी फुलांची बाग फुलवली तिथंच त्यांची राख सावडण्याची वेळ येईल, असं कधी स्वप्नातही आलं नाही.. पण नियतीच्या क्रूर खेळापुढं कुणाचं काही चालत नाही.. अजितदादांची ती दुर्दैवी बातमी आल्यापासून अद्यापपर्यंत डोकं सुन्न आहे… मन बर्फाप्रमाणे थिजलंय.. काय झालं, कसं… pic.twitter.com/vxD2KKfybi — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) January 30, 2026
पोस्ट में रोहित ने नियति से तीखे सवाल पूछे हैं कि दो दिन पहले तक जो इंसान महाराष्ट्र की गाड़ी हांक रहा था और सामान्य जनता के लिए दिन-रात दौड रहा था, वह एक पल में कैसे ओझल हो सकता है? शायद नियति को अजित के विकास की रफ्तार पसंद नहीं आई और इसीलिए उसने उन्हें इतनी जल्दी हमसे छीन लिया।
वे भावुक होकर कहते हैं कि नियति अगर हमारे जैसे लाख लोग भी ले जाती तो गम नहीं होता, लेकिन लाखों के अन्नदाता को इस तरह चुराकर उसने लाखों सपनों को राख कर दी है। रोहित ने अपनी इस पोस्ट के जरिए सीधे अजित पवार से भी शिकायत की है कि पूरे महाराष्ट्र की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है, क्या उन्हें इसकी चिंता नहीं थी, उन्होंने लिखा है कि जो दादा दूसरों की छोटी सी गलती पर भी सबको डांट देते थे।
ये भी पढ़ें :- BMC Mayor 2026: मुंबई को जल्द मिलेगा नया महापौर, बीएमसी में महायुति की सत्ता तय
उन्होंने उस नियति को अपनी कड़क आवाज में क्यों नहीं फटकारा? दादा ने हमेशा हर आने वाले व्यक्ति का काम किया और शायद इसीलिए उन्होंने मृत्यु को भी खाली हाथ वापस नहीं भेजा। रोहित अंत में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि आज राख जमा करते समय ऐसा लग रहा था कि दादा फिनिक्स पक्षी की तरह फिर से उसी शान से खड़े हो जाएंगे और अपनी भारी आवाज में कहेंगे- अरे पागलों, रो क्यों रहे हो? मैं तो बस तुम्हारी आपदा प्रबंधन की तैयारी देख रहा था।






