अजित पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nilesh Nikam NCP: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के आगामी कार्यकाल के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अपने सबसे अनुभवी और रणनीतिकार चेहरे एड. निलेश निकम को ‘गटनेता’ नियुक्त कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सीधी चुनौती दे दी है। निकम की यह नियुक्ति केवल एक पद नहीं, बल्कि सदन के भीतर भाजपा के बहुमत को ‘तथ्यों और नियमों’ से घेरने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
पुणे मनपा में विपक्ष की भूमिका को धार देने के लिए राकांपा ने ‘युवा जोश’ के बजाय ‘अनुभवी नेतृत्व’ पर भरोसा जताया है। गटनेता की रेस में दिग्गज नेता बाबुराव चांदेरे का नाम भी चर्चा में था, लेकिन अजित पवार ने आखिरकार निकम के नाम पर मुहर लगाई। निकम की नियुक्ति के समय विधायक चेतन तुपे, शहराध्यक्ष सुनील टिंगरे और दीपक मानकर की उपस्थिति ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अब सदन में अध्ययनपूर्ण आक्रामकता के साथ उतरेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निलेश निकम केवल शोर मचाने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वे नियमों और आंकड़ों के साथ सत्ताधारियों को निरुत्तर करने की क्षमता रखते हैं। पूर्व में ‘सभागृह नेता’ रह चुके निकम को सदन की कार्यप्रणाली की बारीकियों का ज्ञान है। अजित पवार ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपकर संकेत दिया है कि एनसीपी अब पुणे के विकास कार्यों और बजट आवंटन के एक-एक पैसे का हिसाब मांगेगी।
एड. निलेश निकम का चयन उनकी नगरसेवक के रूप में 20 साल की लंबी पारी और कानून की समझ के कारण किया गया है। 1992 से 2012 तक लगातार चार बार निर्वाचित होने के बाद, अब 14 साल के अंतराल पर 2026 में वे पांचवीं बार चुनकर आए हैं। वर्ष 2009-10 में स्थायी समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पुणे के वित्तीय ढांचे को नई दिशा दी थी। पुणे की प्रसिद्ध ‘शहरी गरीब योजना’ उन्हीं के कार्यकाल की देन है, जो आज भी लाखों लोगों का सहारा है।
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पार्टी ने मुझ पर जो मैं उस पर खरा उतरूंगा। पुणे की जनता के टैक्स के पैसे का सही उपयोग हो, यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होगी। हम गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। प्रशासन और सत्ताधारियों की हर संदिग्ध
– एड. निलेश निकम, नवनियुक्त गटनेता, राकांपा
एनसीपी के इस दांव ने भाजपा खेमे में हलचल तेज कर दी है। चूंकि महापौर का पद आरक्षित होने के कारण भाजपा के कई कद्दावर पुरुष नेताओं की उम्मीदें अब ‘गटनेता’ और ‘सभागृह नेता’ पद पर टिकी हैं। अब चुनौती यह है कि निकम जैसे कानून के जानकार और अनुभवी नेता का मुकाबला करने के लिए भाजपा किसे अपना ‘सेनापति’ बनाती है।
जानकारों का कहना है कि इस कार्यकाल में मनपा का रणक्षेत्र दिलचस्प होगा। एक तरफ भाजपा का विशाल बहुमत है, तो दूसरी तरफ निकम की तार्किक घेराबंदी। अब देखना होगा कि भाजपा ‘शतरंज के खिलाड़ी’ के खिलाफ अपनी कौन-सी चाल चलती है।