
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune News In Hindi: महानगर पालिका चुनाव के प्रचार की गहमागहमी के बीच टैक्स कलेक्शन विभाग का एक चौंकाने वाला और संदिग्ध कामकाज सामने आया है।
नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये का टैक्स बकाया रखने वाले कुछ रसूखदार उम्मीदवारों को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) जारी कर दिए गए हैं। इस खुलासे के बाद मनपा की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
यह मामला शहर के एक क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार क्षेत्र का है, जिसकी चर्चा अब पूरे राजनीतिक गलियारों में है। टैक्स मांग पत्रों के दस्तावेजों के अनुसार, इस कार्यालय के तहत कुछ उम्मीदवारों पर वर्ष 2017 से यानी पिछले आठ वर्षों से लगभग 34 लाख 65 हजार 160 रुपये का टैक्स बकाया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासन द्वारा लाई गई ‘अभय योजना‘ के तहत छूट मिलने के बाद भी करीब 16 लाख 80 हजार 787 रुपये का बकाया शेष दिख रहा है। इतने बड़े बकाए के बावजूद विभाग ने इन्हें एनओसी थमा दी।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि बकाया होने के बाद भी संबंधित उम्मीदवारों ने न केवल चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है, बल्कि आवेदन पत्रों को छानबीन (स्कूटनी) में उन्हें पात्र भी घोषित कर दिया गया है। जब इस चूक पर चुनाव निर्णय अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए पूरी जिम्मेदारी टैक्स कलेक्शन विभाग पर डाल दी।
जिन उम्मीदवारों के नाम पर टैक्स बछाया है और उन्हें एनओसी दी गई है, इसकी गहन जांच की जाएगी। किस आधार पर प्रमाणपत्र जारी हुए, इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
– राम पवार, उपायुक्त, टैक्स कलेक्शन विभाग, पुणे मनपा
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अब चर्चा आम है कि आखिर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसके राजनीतिक दयाव में आकर ये एनओसी जारी की। मनपा अधिनियम के अनुसार, टैक्स बकाया रखने वाला व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होता है। गलत जानकारी देने पर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रावधान है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सामान्य जनता का थोड़ा सा भी टैक्स बकाय होने पर मनपा जब्ती और बैंड-बाजे बजाकर सार्वजनिक अपमान जैसी कठोर कार्रवाई करती है, लेकिन प्रभावशाली उम्मीदवारों को प्रशासनिक आशीर्वाद’ दिया जा रहा है।






