
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Pune Municipal Election: पुणे महानगर पालिका चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन पुणे की सड़कों पर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बीच जुबानी जंग ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है।
विशेष रूप से मेट्रो और बस में मुफ्त सफर की घोषणा को लेकर दोनों दिग्गजों के बीच तीखी बयानबाजी हुई, जिससे साफ हो गया कि आगामी चुनाव में असली मुकाबला महायुति के इन दो प्रमुख घटकों के बीच अपनी साख बचाने का है।
शिवाजीनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की समापन सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के चुनावी वादों पर कड़ा प्रहार किया।
मुख्यमंत्री के ‘बाजीराव’ वाले तंज पर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर करारा जवाब दिया। पवार ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री ने मुझे बाजीराव कहा, इसके लिए उनका शुक्रिया।
बाजीराव वीर और पराक्रमी थे, यह मेरे लिए गर्व की बात है।’ अजीत पवार ने फडणवीस को घेरते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि ‘जेब में पैसा नहीं है। तो वे अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि भाजपा के शासनकाल में पुणे महानगर पालिका की तिजोरी खाली हो गई है।
उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि हमारा ‘अलार्म शहर को भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन से बचाने के लिए है, और जनता ‘घड़ी’ का बटन दबाकर इस खतरे को खत्म करेगी।
मुफ्त यात्रा योजना का बचाव करते हुए पवार ने तकनीकी पक्ष रखा। उन्होंने कहा, ‘यह फैसला विशेषज्ञों से सलाह के बाद लिया गया है। इस योजना पर निकाय बजट का केवल 2% खर्च होगा।
इससे विद्यार्थियों, कामकाजी महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा तो प्रदूषण और ट्रैफिक जाम भी कम होगा।’
पवार ने पिंपरी-चिंचवड की सभा में एक बड़ा भावनात्मक कार्ड खेला। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को सार्वजनिक करते हुए कहा, “मैं अब तक छह बार उपमुख्यमंत्री बन चुका हूं।
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कई बार मुख्यमंत्री का पद मुंह तक आकर छूट गया, लेकिन अगर मेरी ‘लाडली बहनों’ का आशीर्वाद रहा, तो इस बार यह मौका हाथ से नहीं जाने दूंगा’ चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पुणे के मतदाताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। पुणे की जनता फडणवीस के ‘विकास और अनुशासन’ पर भरोसा जताती है।






