देवेंद्र फडणवीस व अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP No Celebration Pune: महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में राजनीतिक हलचल तेज है। पुणे महानगरपालिका (PMC) के नए महापौर और उपमहापौर के चुनाव के लिए 9 फरवरी 2026 की तारीख तय की गई है। हालांकि, भाजपा के पास पूर्ण बहुमत होने के कारण यह जीत लगभग सुनिश्चित है, लेकिन शहर में कोई उत्सव का माहौल नहीं दिखेगा। उपमुख्यमंत्री और पुणे के पालक मंत्री अजित पवार के हालिया निधन के कारण भाजपा ने निर्णय लिया है कि वे अपनी जीत पर किसी भी प्रकार का जश्न, गुलाल या पटाखों का प्रदर्शन नहीं करेंगे।
पुणे महानगरपालिका में भाजपा के पास 119 नगरसेवकों का स्पष्ट बहुमत है, जिससे यह चुनावी प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। भाजपा ने महापौर पद के लिए मंजुषा नागपुरे को अपना चेहरा बनाया है, जबकि उपमहापौर पद के लिए परशुराम वाडेकर ने अपना नामांकन दाखिल किया है। हालांकि कांग्रेस भी इस चुनावी दौड़ में शामिल है, लेकिन संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के कारण मंजुषा नागपुरे की जीत निश्चित मानी जा रही है।
मंजुषा नागपुरे भाजपा की एक निष्ठावान और अनुभवी नेता के रूप में जानी जाती हैं। वे लगातार तीसरी बार नगरसेविका चुनी गई हैं और इस बार प्रभाग क्रमांक 34 से निर्विरोध विजयी हुई हैं। उनके महापौर बनने के साथ ही सिंहगढ़ रोड क्षेत्र को पहली बार महापौर पद का सम्मान मिलेगा। उनके पास स्थायी समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों में काम करने का लंबा अनुभव भी है।
भाजपा के गटनेता गणेश बिडकर ने जानकारी दी कि वरिष्ठ नेतृत्व ने अजित पवार के निधन के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सादगी से चुनाव संपन्न कराने का निर्णय लिया है। बिडकर के अनुसार, पुणे के विकास में अजित पवार का योगदान अमूल्य रहा है और कई पार्षदों ने उनके साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा, “राजनीति से ऊपर मानवता, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्य होते हैं”। इसी भावना के तहत, महानगरपालिका की पहली आम सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और उनकी यादों को ताजा किया जाएगा।
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9 फरवरी को सुबह 11 बजे जिला कलेक्टर और पीठासीन अधिकारी जि जितेंद्र डुडी की उपस्थिति में यह प्रक्रिया शुरू होगी। नियमों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी नामांकन वापस लेने के लिए 15 मिनट का समय देंगे, जिसके बाद मतदान और परिणामों की घोषणा की जाएगी। पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई भी विजय जुलूस या जश्न नहीं मनाया जाएगा।