मणिपुर में फिर बवाल शुरू… कुकी संगठनों ने नई सरकार को लेकर अपने विधायकों को दे डाली चेतावनी, वजह क्या?
Manipur News : मणिपुर में फिर राजनीतिक और सामाजिक तनाव गहराता दिख रहा है। कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को चेतावनी दे डाली है। कई संगठनों ने शुक्रवार को बंद का ऐलान किया है।
- Written By: रंजन कुमार
अपने कार्यालय में मणिपुर के नए सीएम युमनाम खेमचंद सिंह। इमेज-सोशल मीडिया
Manipur New Government Controversy : मणिपुर में करीब एक साल लंबे राष्ट्रपति शासन के बाद आखिरकार लोकतांत्रिक सरकार की वापसी हो गई है, लेकिन राज्य में शांति का रास्ता अभी भी कांटों भरा नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। हालांकि, उनके पद संभालते ही कुकी बहुल इलाकों में विरोध की चिंगारी फिर से भड़क उठी है।
4 फरवरी को हुए शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के साथ दो उप मुख्यमंत्रियों ने भी पद की शपथ ली। इनमें कुकी समुदाय की कद्दावर नेता और बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नागा पीपल्स फ्रंट के एल. दिखो शामिल हैं। नेमचा किपगेन को सरकार में शामिल किए जाने से कुकी संगठन नाराज हैं। बुधवार रात कांगपोकपी जिले में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर टायर जलाए और बांस के खंभे लगाकर आवाजाही रोक दी।
बंद का आह्वान और कुकी संगठनों की चेतावनी
चुराचांदपुर जिले के आदिवासी संगठन जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF-7) ने शुक्रवार को कुकी-जो बहुल इलाकों में सुबह 6 से शाम 6 बजे तक पूर्ण बंद का ऐलान किया है। संगठन ने फिर अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि उन्हें अलग प्रशासन से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। कुकी-जो काउंसिल ने अपने विधायकों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी विधायक सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर सरकार का हिस्सा बनता है तो इसके परिणामों की जिम्मेदारी उसकी व्यक्तिगत होगी।
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हिंसा का घाव और राजनीतिक स्थिरता
गौरतलब है कि मणिपुर 3 मई 2023 से जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहा है। मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के खिलाफ शुरू हुई इस हिंसा ने अब तक 260 से अधिक लोगों की जान ले ली है। हजारों लोग बेघर होकर राहत शिविरों में जीवन बिता रहे हैं। इसी अस्थिरता के कारण पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को पद छोड़ना पड़ा था। अब जब नई सरकार ने कमान संभाली है तो कुकी संगठनों का यह कड़ा विरोध मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। राज्य में समुदायों के बीच सुलह कराना और कानून-व्यवस्था बहाल करना नई सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
