देंवेद्र फडणवीस व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP Offer To Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन के समीकरणों ने एक बार फिर करवट ली है। चंद्रपुर महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर चल रहा गतिरोध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) के सामने सत्ता की साझेदारी का एक विशेष ‘सव्वा-सव्वा साल’ (15-15 महीने) का फॉर्मूला पेश किया है यह प्रस्ताव उद्धव सेना के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे को भेजा गया है, लेकिन सेना की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
चंद्रपुर नगर निगम में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए 34 नगरसेवकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान में स्थिति काफी दिलचस्प है। बीजेपी के पास अपने 23 और शिंदे गुट का 1 नगरसेवक मिलाकर कुल 24 सदस्य हैं। उद्धव सेना के पास 6 पार्षद हैं, जबकि वंचित बहुजन अघाड़ी के पास 2 और 2 निर्दलीय सदस्य हैं। अगर ये सभी (24 + 6 + 2 + 2) एक साथ आते हैं, तो यह संख्या ठीक 34 हो जाती है, जो सत्ता स्थापना के लिए पर्याप्त है। बीजेपी इसी ‘रोडमैप’ के सहारे प्रशासन पर कब्जा करना चाहती है।
इस राजनीतिक खींचतान के पीछे का असली कारण महापौर पद का आरक्षण है। इस वर्ष यह पद ओबीसी महिला प्रवर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। उद्धव सेना के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे की पत्नी, मनस्वी गिन्हे, नगरसेवक के रूप में चुनी गई हैं और वे महापौर बनने की प्रबल दावेदार हैं।
उद्धव सेना की चिंता यह है कि महापौर पद का आरक्षण हर ढ़ाई साल में बदल जाता है। यदि वे अभी महापौर पद नहीं लेते, तो ढ़ाई साल बाद आरक्षण बदलने पर उन्हें यह मौका फिर शायद न मिले। इसी कारण उद्धव सेना चाहती है कि उन्हें पहले ही चरण में महापौर पद दिया जाए। दूसरी ओर, बीजेपी ने अपने प्रस्ताव में सत्ता को बराबर बांटने (1.25 साल प्रत्येक) की बात कही है।
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हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस 27 नगरसेवकों के साथ सबसे बड़ा दल है और सहयोगियों के साथ उनका आंकड़ा 30 तक पहुंचता है। लेकिन, पार्टी के भीतर जारी आंतरिक गुटबाजी और कलह के कारण वे बहुमत से केवल 4 सीट दूर रहकर भी सत्ता से बाहर होते दिख रहे हैं। बीजेपी के विधायक किशोर जोरगेवार का कहना है कि उन्होंने उद्धव सेना को सकारात्मक प्रस्ताव दिया है और उन्हें जल्द ही अच्छे निर्णय की प्रतीक्षा है।