Pune: विदर्भ-मराठवाड़ा बने अतिवृष्टि हॉटस्पॉट, कोकण में समुद्र बढ़ने की रफ्तार तेज
IITM पुणे के अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि महाराष्ट्र में गर्मी और समुद्र स्तर वृद्धि आने वाले वर्षों में और तेज होगी। विदर्भ-मराठवाड़ा अतिवृष्टि हॉटस्पॉट बन रहे हैं, जबकि कोकण में तटीय खतरा बढ़ रहा।
- Written By: अपूर्वा नायक
आईआईटीएम पुणे (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: भारत के क्षेत्रीय जलवायु पैटर्न में तेजी से बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं और इन बदलावों का असर राज्यों के अनुसार अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र को लेकर विशेषज्ञों ने विशेष चेतावनी जारी की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में मराठवाड़ा और विदर्भ लगातार अतिवृष्टि के हॉटस्पॉट बने रहेंगे, जबकि कोकण में समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में गर्मी की लहरें, अनियमित -अतिवृष्टि और सूखा तोनों स्थितियां एक साथ देखने को मिल सकती हैं।
यह निष्कर्ष आईआईटीएम, पुणे द्वारा किए गए व्यापक राज्यवार जलवायु अध्ययन में सामने आया है। वैज्ञानिक डॉ। रॉक्सी मैथ्यू करेल, जो इन दिनों पेरिस में आयोजित वैश्विक जलवायु सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, अपने सहकर्मियों चिराग धारा, अदिति देशपांडे, पद्मिनी दलपदाडो और मंदिरा सिंह के साथ मिलकर यह महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया।
सम्बंधित ख़बरें
नासिक सिंहस्थ का शंखनाद, रामकुंड पर ध्वजस्तंभ पूजन, 12 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी
Shukrawar Vrat: शुक्रवार का व्रत कर रहे हैं? वैभव लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़ें यह कथा
नीति आयोग बैठक में फडणवीस का विजन 2047 रोडमैप, महाराष्ट्र को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
वर्धा: MahaDBT पोर्टल अपडेट से छात्रवृत्ति प्रक्रिया ठप, 2,235 आवेदन कॉलेज स्तर पर लंबित
डॉ कोल की महाराष्ट्र पर प्रमुख टिप्पणियां
- इस वर्ष ही बदलावों की झलक दिखी, आने वाले समय में असर और तेज होगा।
- राज्य में गर्मी की तीव्रता में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज – लुकी अवधि अधिक लंबी और घातक होने की संभावना।
- अरब सागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भीषण चक्रवात, तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
- विदर्भ और मराठवाड़ा अब “अतिवृष्टि हॉटस्पॉट’ के रूप में उभर रहे है।
- कोकण में समुद्र स्तर लगातार बढ़ रहा है और समुद्री गर्मी की लहरे बार-बार आ रही है।
- इन बदलावों से कोकण के मत्स्य व्यवसाय और तटीय आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है।
सुझाए गए उपाय
- स्थानीय चेतावनी प्रणाली की मजबूत करना
- गर्मी-सहिष्णु शहरों का विकास
- तटीय क्षेत्रों और ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा
- विवित्र जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारण
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में रिकॉर्ड वृद्धि
ये भी पढ़ें :- Pune: कोथरूड में 14.39 करोड़ की ठगी, आरोपियों के 39 बैंक खाते व 54 लाख जब्त
प्रमुख प्रभाव
- हिंद महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी
- बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ी
- समुद्र स्तर में तेजी से इजाफा
